Lassi Benefits and Side Effects: क्या आपको भी लस्सी पीने के बाद नींद आती है? जानिए इसके पीछे का कारण, एक्सपर्ट्स की राय और इसे पीने का सही तरीका।
Lassi Benefits and Side Effects: गर्मियों में ठंडी लस्सी पीना हर किसी को पसंद होता है। लेकिन कई लोगों की एक कॉमन शिकायत होती है, लस्सी पीने के बाद नींद सी आने लगती है। क्या यह सिर्फ स्वाद और ठंडक का असर है या इसके पीछे कोई साइंस भी है? एक्सपर्ट्स और रिसर्च बताते हैं कि इसके पीछे शरीर की नैचुरल प्रक्रिया काम करती है।
डॉक्टर विनी कांट्रू के मुताबिक, लस्सी पीने के बाद हल्की नींद आना आम बात है और यह शरीर का नेचुरल रिस्पॉन्स है। लस्सी दही से बनती है, जिसमें ट्रिप्टोफैन नाम का एमिनो एसिड होता है। यह शरीर में सेरोटोनिन बढ़ाता है, जो दिमाग को रिलैक्स करता है और नींद जैसा फील देता है।
न्यूट्रिशनिस्ट रुचिका जैन बताती हैं कि लस्सी कई तरह से ब्रेन के केमिकल्स को प्रभावित करती है। दही में मौजूद ट्रिप्टोफैन से मेलाटोनिन (sleep hormone) बनने में मदद मिलती है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम और जिंक भी नींद को बढ़ावा देते हैं। अगर लस्सी मीठी और गाढ़ी हो, तो यह पचने में भारी होती है, जिससे शरीर सुस्त महसूस करता है।
जब आप भारी या गाढ़ी चीज खाते-पीते हैं, तो शरीर का फोकस पाचन पर चला जाता है। इस प्रोसेस को “rest and digest” कहा जाता है। लस्सी अगर ज्यादा मात्रा में या भारी खाने के बाद पी जाए, तो शरीर और ज्यादा सुस्त महसूस कर सकता है।
ट्रेडिशनल लस्सी थोड़ी गाढ़ी और रिच होती है, इसलिए यह हल्की ड्रिंक्स के मुकाबले पचने में ज्यादा समय लेती है। खासकर अगर आपने पहले से तला-भुना खाना खाया है, तो लस्सी पीने के बाद नींद या भारीपन ज्यादा महसूस हो सकता है।
कुछ लोगों में, खासकर जिन्हें एसिडिटी या रिफ्लक्स की समस्या होती है, भारी लस्सी पीने के बाद हल्की सांस की असहजता और थकान महसूस हो सकती है।
नहीं, हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से रिएक्ट करता है। आपने कितनी मात्रा में लस्सी पी, उसमें शुगर कितनी थी। आपकी पाचन क्षमता के साथ मेटाबॉलिज्म और कोई पहले से हेल्थ प्रॉब्लम पर निर्भर करता है।
जरूरी नहीं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि लस्सी से पूरी तरह बचने की जरूरत नहीं है, बल्कि कम मात्रा में पिएं। मीठी की जगह नमकीन या पतली लस्सी चुनें। रात के समय पीने से बचें।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।