Hypogonadism Symptoms: लगातार थकान, सेक्स ड्राइव में कमी और मसल्स कम होना ये Low Testosterone के संकेत हो सकते हैं। जानिए लक्षण, कारण और कब कराएं जांच।
Hypogonadism Symptoms: टेस्टोस्टेरोन को अक्सर मेल हार्मोन कहा जाता है, लेकिन इसका काम सिर्फ मसल्स या सेक्स ड्राइव तक सीमित नहीं होता। यह हड्डियों को मजबूत रखने, दिमाग की कार्यक्षमता, ऊर्जा और पूरे शरीर की सेहत के लिए बेहद जरूरी होता है। उम्र बढ़ने के साथ इसका स्तर धीरे-धीरे कम होना सामान्य है, लेकिन अगर यह बहुत ज्यादा कम हो जाए तो जीवन की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
कम टेस्टोस्टेरोन की स्थिति को हाइपोगोनाडिज्म कहा जाता है, और यह जितना लोग सोचते हैं उससे ज्यादा आम है। समस्या यह है कि इसके लक्षण धीरे-धीरे दिखते हैं, इसलिए लोग इन्हें अक्सर उम्र, तनाव या नींद की कमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
कभी-कभी थकान होना सामान्य है, लेकिन अगर पर्याप्त नींद लेने के बाद भी आप हर समय थका हुआ महसूस करते हैं, तो यह कम टेस्टोस्टेरोन का संकेत हो सकता है। रिसर्च के अनुसार 45 साल से ऊपर के कई पुरुषों में यह समस्या देखी जाती है। अगर रोजमर्रा के काम जैसे सीढ़ियां चढ़ना या सामान उठाना भी मुश्किल लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
सेक्स की इच्छा कम होना कम टेस्टोस्टेरोन का आम संकेत है। तनाव या मानसिक स्थिति के कारण भी ऐसा हो सकता है, लेकिन अगर लंबे समय तक रुचि कम बनी रहे या इरेक्शन से जुड़ी समस्याएं बढ़ें, तो हार्मोन असंतुलन हो सकता है।
टेस्टोस्टेरोन मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने और शरीर में फैट कंट्रोल करने में मदद करता है। अगर बिना वजह मसल्स घटने लगें या पेट की चर्बी बढ़ जाए, तो यह हार्मोन लेवल कम होने का संकेत हो सकता है। कुछ पुरुषों में छाती के आसपास फैट भी बढ़ सकता है।
यह हार्मोन मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। कम टेस्टोस्टेरोन होने पर चिड़चिड़ापन, चिंता, उदासी या आत्मविश्वास में कमी महसूस हो सकती है। कई बार ध्यान लगाने में भी परेशानी होती है, जिसे लोग काम के तनाव से जोड़ देते हैं।
टेस्टोस्टेरोन हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है। लंबे समय तक इसकी कमी रहने पर हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है। बिना वजह हड्डी टूटना या लंबाई कम लगना गंभीर संकेत हो सकता है।
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, बढ़ती उम्र, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, लगातार तनाव, नींद की कमी, कुछ दवाइयां या हार्मोन से जुड़ी बीमारियां।
अगर ये लक्षण लगातार दिखें, तो ब्लड टेस्ट कराना जरूरी है। आमतौर पर डॉक्टर सुबह टेस्ट करवाते हैं क्योंकि उस समय हार्मोन लेवल सबसे ज्यादा होता है। विशेषज्ञों जैसे American Urological Association भी सलाह देते हैं कि बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट या थेरेपी शुरू न करें।