स्वास्थ्य

Menstrual Hygiene: जानलेवा हो सकती है ये लापरवाही! सुप्रीम कोर्ट ने बताया क्यों जरूरी है पीरियड्स में सही पैड और साफ टॉयलेट

Menstrual Hygiene: सुप्रीम कोर्ट ने कहा मासिक धर्म स्वच्छता महिलाओं की सेहत से जुड़ा मौलिक अधिकार है। स्कूलों में मुफ्त सैनिटरी पैड और साफ टॉयलेट अनिवार्य।
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Jan 30, 2026
Menstrual Hygiene
Menstrual Hygiene (photo- gemini ai)

Menstrual Hygiene: सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत अहम और सेहत से जुड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई और जरूरी सुविधाएं मिलना महिलाओं और लड़कियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। कोर्ट ने साफ कहा कि पीरियड्स से जुड़ी स्वच्छता सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का मूल अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आता है।

पीरियड्स और सेहत का सीधा संबंध

कोर्ट ने माना कि अगर लड़कियों को समय पर साफ सैनिटरी पैड, साफ टॉयलेट और पानी जैसी बुनियादी चीजें नहीं मिलतीं, तो इससे इंफेक्शन, यूरिन इंफेक्शन, स्किन प्रॉब्लम, पेट दर्द और रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। खासकर स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए यह और भी खतरनाक साबित हो सकता है।

स्कूलों में मुफ्त सैनिटरी पैड जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि हर स्कूल में छात्राओं को मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन दिए जाएं। कोर्ट ने कहा कि पीरियड्स के दौरान अगर सही पैड न मिले, तो लड़कियां गंदे कपड़े या असुरक्षित साधनों का इस्तेमाल करती हैं, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

साफ शौचालय न हों तो बढ़ता है संक्रमण

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि हर स्कूल में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग और साफ शौचालय होने चाहिए, साथ ही दिव्यांग बच्चों के लिए भी सुविधाजनक टॉयलेट जरूरी हैं। अदालत ने माना कि गंदे या न होने वाले टॉयलेट की वजह से लड़कियां पेशाब रोकती हैं, जिससे किडनी और यूरिन इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर

पीरियड्स को लेकर शर्म, डर और चुप्पी का माहौल लड़कियों के मेंटल हेल्थ को भी नुकसान पहुंचाता है। कोर्ट ने कहा कि जब लड़कियां मदद मांगने में झिझकती हैं या अपमान का डर होता है, तो इससे तनाव, एंग्जायटी और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।

पीरियड-शेमिंग से बिगड़ती सेहत

हरियाणा की एक यूनिवर्सिटी में महिला कर्मचारियों से सैनिटरी पैड की तस्वीर मंगवाने की घटना पर कोर्ट ने गहरी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाएं महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं और उन्हें अपमान व तनाव से गुजरना पड़ता है।

सरकार की जिम्मेदारी तय

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अगर सरकारें स्कूलों में शौचालय और मुफ्त सैनिटरी पैड नहीं देती हैं, तो उन्हें इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। कोर्ट ने माना कि महिलाओं का अच्छा स्वास्थ्य तभी संभव है, जब पीरियड्स को सामान्य जैविक प्रक्रिया की तरह देखा जाए, न कि शर्म की चीज समझा जाए।

Updated on:
30 Jan 2026 04:20 pm
Published on:
30 Jan 2026 04:20 pm