
Mental Wellbeing Tips NHS: भागदौड़ भरी जिंदगी और काम के तनाव के बीच मानसिक रूप से स्वस्थ रहना एक बड़ी चुनौती बन गया है। एनएचएस (National Health Service) ने मानसिक सेहत को मजबूत और खुशहाल बनाए रखने के लिए 5 बेहद आसान और व्यावहारिक टिप्स शेयर किए हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य का सीधा-सा मतलब है, आपके मन और दिमाग की सेहत। यह तय करता है कि आप कैसा महसूस करते हैं, कैसा सोचते हैं और रोजमर्रा की जिंदगी में कैसे काम करते हैं। आइए जानते हैं कि कैसे इन तरीकों को अपनाकर आप तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से खुद को कोसों दूर रख सकते हैं।
एनएचएस के अनुसार, हमारे अच्छे रिश्ते मानसिक सेहत के लिए बहुत जरूरी हैं। परिवार, दोस्तों के साथ बिताया गया समय हमें सुरक्षित महसूस कराता है और अकेलापन दूर करता है। रोजाना टीवी या मोबाइल देखने के बजाय परिवार के साथ बैठकर खाना खाएं। पुराने दोस्तों से फोन पर बात करें या मिलने का प्लान बनाएं।
एक्टिव रहने का मतलब सिर्फ जिम में भारी वजन उठाना नहीं है। जब आप कोई भी शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो दिमाग में एंडोर्फिन नाम का केमिकल रिलीज होता है, जो आपके मूड को तुरंत बेहतर बनाता है। अपनी पसंद का कोई खेल खेलें, डांस करें, या रोजाना सिर्फ 20-30 मिनट तेज वॉक करें। सीढ़ियों का इस्तेमाल करना भी एक अच्छा जरिया है।
जब आप कोई नई चीज सीखते हैं, तो आपका आत्मविश्वास बढ़ता है। इससे दिमाग एक्टिव रहता है। इसके लिए किसी बड़ी डिग्री की जरूरत नहीं है। आप कोई नई डिश बनाना सीख सकते हैं, कोई नई भाषा, पेंटिंग, या फिर घर की खराब चीजों को ठीक करना सीख सकते हैं।
दूसरों की मदद करने से जो खुशी मिलती है, वह कमाल की होती है। वैज्ञानिक रूप से भी प्रमाणित है कि दयालुता का भाव हमारे दिमाग में हैप्पी हार्मोन्स बढ़ाता है। किसी जरूरतमंद की आर्थिक या मानसिक मदद करें। अपने दोस्तों या करीबियों को उनकी किसी खूबी के लिए थैंक यू कहें या उनकी तारीफ करें।
अक्सर हमारी दिमागी थकान का कारण यह होता है कि हम या तो बीते हुए कल के बारे में सोचते रहते हैं या आने वाले कल की चिंता करते हैं। वर्तमान पल में जीना ही माइंडफुलनेस है। जब आप खा रहे हों, चल रहे हों या काम कर रहे हों, तो पूरा ध्यान उसी चीज पर लगाएं। अपने आसपास की आवाजों, खुशबू और प्रकृति को महसूस करें। इससे तनाव का स्तर तुरंत कम होता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।