
Migraine VS Cervicogenic Headache: बार-बार सिरदर्द होना कोई बड़ी बात नहीं है ये आज की सामान्य समस्या बन गयी है। उम्र चाहे कम हो या अधिक ये समस्या हर आयु वर्ग में देखने को मिल रही है। दर्द हुआ नहीं की लोग पेनकिलर लेकर इससे पीछा छुड़वाने की कोशिश करता है। इसके साथ ही लोगों को ये भी लगता है अगर हमारे सिरदर्द है तो वो बस माइग्रेन के कारण हो रहा है। असल में सच्चाई कुछ और होती है आपको हर बार होने वाला सिरदर्द माइग्रेन नहीं होता है।
ये सर्वाइकोजेनिक के कारण होता है, आइए आइए डॉ. हरीश ग्रोवर(कायरोप्रैक्टर) से जानते है की इन दोनों में से क्या अंतर होता है , इनके लक्षण क्या होते है और इनसे कैसे बचें?
माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल (दिमाग से जुड़ी) स्थिति है, जिसमें सिर के एक हिस्से में तेज टीस मारने वाला (Throbbing) दर्द होता है। यह दर्द अक्सर दिमाग के असंतुलन के कारण होता है। इसके साथ व्यक्ति को जी मिचलाना, उल्टी आना और तेज रोशनी या शोर से अत्यधिक चिड़चिड़ाहट महसूस होती है। यह दर्द घंटों से लेकर कई दिनों तक रह सकता है और अक्सर तनाव, नींद की कमी या किसी खास गंध/भोजन से शुरू (Trigger) होता है।
सर्वाइकोजेनिक सिरदर्द असल में एक 'रेफर्ड पेन' है, जिसका असली स्रोत सिर नहीं बल्कि आपकी गर्दन (Cervical Spine) होती है। जब गर्दन की ऊपरी तीन हड्डियों, जोड़ों या मांसपेशियों में कोई खराबी या जकड़न आती है, तो उसका दर्द रिफ्लेक्ट होकर सिर के पिछले हिस्से, माथे या आंखों के पीछे महसूस होने लगता है। यह अक्सर गलत पोस्चर (जैसे झुककर मोबाइल देखना) या गर्दन की पुरानी चोट के कारण होता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।