Nephrotic Syndrome Symptoms in Hindi: सुबह उठते ही आंखों और पैरों में सूजन नेफ्रोटिक सिंड्रोम का संकेत हो सकती है। जानें क्यों किडनी से प्रोटीन का लीक होना आपकी सेहत के लिए खतरनाक है और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं।
Nephrotic Syndrome Symptoms in Hindi: अक्सर हम सुबह सोकर उठने के बाद आईने में अपनी सूजी हुई आंखें देखते हैं। ज्यादातर लोग इसे देर रात तक जागने, नमक ज्यादा खाने या थकान का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर यह सूजन (Swelling) रोज सुबह आपके चेहरे पर दिख रही है और शाम होते-होते पैरों तक पहुंच रही है, तो यह आपकी किडनी की मदद की पुकार हो सकती है? मेडिकल भाषा में इसे नेफ्रोटिक सिंड्रोम (Nephrotic Syndrome) कहा जाता है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिसर्च के अनुसार, हमारी किडनी में 'ग्लोमेरुली' (Glomeruli) नामक लाखों छोटे फिल्टर होते हैं। इनका काम खून को साफ करना और जरूरी तत्वों को शरीर में वापस भेजना है। लेकिन जब ये फिल्टर डैमेज हो जाते हैं, तो शरीर के लिए जरूरी एल्ब्यूमिन (Albumin) नामक प्रोटीन पेशाब के रास्ते बाहर निकलने लगता है।
जब खून में प्रोटीन का स्तर कम हो जाता है, तो नसों में पानी रुकने के बजाय ऊतकों (Tissues) में रिसने लगता है, जिससे शरीर के अंगों में सूजन आ जाती है। Mayo Clinic की स्टडी बताती है कि नेफ्रोटिक सिंड्रोम कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि उन लक्षणों का समूह है जो किडनी की खराबी को दर्शाते हैं।
इस विषय पर वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. संजीव मलिक ने बताया कि "नेफ्रोटिक सिंड्रोम को अक्सर लोग सामान्य सूजन समझ लेते हैं, लेकिन यह किडनी फेलियर की पहली सीढ़ी हो सकती है। जब किडनी से प्रोटीन लीक होता है, तो शरीर में संक्रमण का खतरा और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ जाता है। अगर पेशाब में झाग दिखे या सूजन बनी रहे, तो तुरंत एक साधारण 'यूरिन टेस्ट' कराना चाहिए।"
शरीर में दिखने वाला छोटा सा बदलाव भी बड़ी बीमारी की आहट हो सकता है। नेफ्रोटिक सिंड्रोम का समय पर इलाज न होने से किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अगली बार जब आप सुबह आईने में सूजन देखें, तो इसे हल्के में न लें।
यदि आप अपनी किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो इस चेकलिस्ट के जरिए अपनी आदतों और शरीर के संकेतों को ट्रैक करें:
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।