Cancer Prevention Tips: भारत में कौन-कौन से कैंसर सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं? ब्रेस्ट, ओरल, सर्वाइकल और लंग कैंसर के कारण, खतरे और बचाव के आसान तरीके जानिए।
Cancer Prevention Tips: कैंसर दुनिया की सबसे गंभीर और डरावनी बीमारियों में से एक माना जाता है। यह शरीर की कोशिकाओं में अनियंत्रित वृद्धि के कारण होता है और शरीर के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। Cancer Research UK के अनुसार, कैंसर के 200 से ज्यादा प्रकार होते हैं, जिन्हें इस आधार पर अलग किया जाता है कि वे किस तरह की कोशिकाओं से शुरू होते हैं।
कार्सिनोमा - त्वचा या शरीर के अंदरूनी अंगों की सतह से शुरू होता है
सारकोमा - हड्डी, मांसपेशी या अन्य सहायक ऊतकों से शुरू होता है
ल्यूकेमिया - सफेद रक्त कोशिकाओं का कैंसर
लिम्फोमा और मायलोमा - इम्यून सिस्टम से जुड़ा कैंसर
ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड कैंसर - केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़ा
हाल ही में डॉ जयेश शर्मा, जो 25 साल से ज्यादा अनुभव वाले सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट हैं, ने बताया कि आज के समय में भारत में कुछ कैंसर ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह जानकारी MHB Bytes पॉडकास्ट में साझा की, जिसका वीडियो उन्होंने अपने Instagram अकाउंट पर भी पोस्ट किया। उनके मुताबिक पहले महिलाओं में सबसे आम कैंसर सर्वाइकल कैंसर था, लेकिन अब ब्रेस्ट कैंसर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है, महिलाओं और पुरुषों दोनों में। इसके पीछे बदलती जीवनशैली, बढ़ती उम्र और स्तनपान में कमी जैसे कारण माने जा रहे हैं।
ब्रेस्ट कैंसर- महिलाओं में सबसे ज्यादा पाया जाता है। उम्र बढ़ना, मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि, शराब और पारिवारिक इतिहास जोखिम बढ़ाते हैं। जल्दी जांच और मैमोग्राफी से इसे शुरुआती स्टेज में पकड़ा जा सकता है।
सर्वाइकल कैंसर- अधिकतर HPV संक्रमण के कारण होता है। HPV वैक्सीन और नियमित जांच से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है।
ओरल कैंसर- तंबाकू, गुटखा, पान मसाला और शराब इसके मुख्य कारण हैं। भारत में यह काफी आम है, लेकिन तंबाकू छोड़कर इसे रोका जा सकता है।
लंग कैंसर- धूम्रपान इसका सबसे बड़ा कारण है। सेकेंड हैंड स्मोक यानी दूसरों के धुएं से भी खतरा बढ़ता है।
कोलन कैंसर- शहरी इलाकों में तेजी से बढ़ रहा है। कम फाइबर वाला खाना, ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, मोटापा और बैठा-बैठा जीवन इसका कारण बनते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर अचानक नहीं होता, बल्कि हमारी जीवनशैली और आदतें इसमें बड़ी भूमिका निभाती हैं। समय पर जांच डर नहीं बढ़ाती, बल्कि जीवन बचाने का मौका देती है। इसलिए रोकथाम और जल्दी पहचान ही सबसे बड़ा बचाव है।