स्वास्थ्य

Vrat Diet Plan: व्रत में खाने का सही समय क्या होता है? क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें Intermittent Fasting से लेकर मील गैप तक

Vrat Diet Plan: व्रत या उपवास में दिन में कितनी बार खाना चाहिए? एनसीबीआइ और क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें सही मील गैप, फलाहार का सही तरीका और सेहतमंद रहने के उपाय।
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Oct 13, 2026
A healthy and balanced Navratri vrat meal with fruits, dry fruits, and water
व्रत में खाने का सही समय क्या होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Gemini)

Vrat Diet Plan: नवरात्रि के पावन दिनों में हममें से बहुत से लोग उपवास रखते हैं। व्रत रखने से मन को तो शांति मिलती ही है, साथ ही अगर सही ढंग से खान-पान रखा जाए तो शरीर की भी अच्छी सफाई हो जाती है। लेकिन अक्सर देखने में आता है कि लोग व्रत के चक्कर में दो बड़ी गलतियां कर बैठते हैं या तो वे दिनभर कुछ भी नहीं खाते और एकदम भूखे बने रहते हैं, या फिर फलाहार के नाम पर बार-बार आलू, कुट्टू की पकौड़ियां और तला-भुना खाते रहते हैं। ये दोनों ही तरीके आपकी सेहत बिगाड़ सकते हैं। पूरा दिन भूखे रहने से सिर में तेज दर्द, गैस, एसिडिटी और भारी थकावट होने लगती है। दूसरी तरफ, थोड़ी-थोड़ी देर में भारी चीज़ें चबाते रहने से पेट का हाजमा बिगड़ जाता है। इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि व्रत के दौरान दिन में कितनी बार खाना चाहिए और खाने के बीच कितना फर्क यानी गैप होना चाहिए।

खाने के बीच गैप रखना क्यों जरूरी है?

एनसीबीआइ के अनुसार, जब हम आम दिनों में खाना खाते हैं, तो हमारे शरीर को उसे पचाने में थोड़ा समय लगता है। उपवास का असली फायदा तभी मिलता है जब हम अपने पेट और पाचन तंत्र को आराम करने का मौका दें। अगर आप हर एक-दो घंटे में कुछ न कुछ खाते रहेंगे, तो पेट को कभी आराम ही नहीं मिलेगा। इससे पेट भारी रहेगा और सुस्ती छाई रहेगी। इसके उलट, जब आप दो बार के खाने के बीच 3 से 4 घंटे का सही फासला रखते हैं, तो शरीर को पिछला खाना पचाने का पूरा समय मिल जाता है। इससे शरीर में सुस्ती नहीं आती, खून में शुगर का स्तर बना रहता है और आप दिनभर ताजगी महसूस करते हैं।

दिन में कितनी बार खाना सही है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, आंतरायिक व्रत में पूरे दिन में 3 से 4 बार थोड़ा-थोड़ा और पौष्टिक खाना सबसे सही रहता है। इसका मतलब यह नहीं है कि आप चारों बार भारी खाना खाएं, बल्कि दो बार हल्का भोजन और दो बार जूस या फल ले सकते हैं।

  • सुबह का समय (सुबह 8 से 9 बजे)- सुबह-सुबह खाली पेट सीधे चाय पीने से बचें। पहले एक गिलास पानी, नारियल पानी, या फिर भीगे हुए 4-5 बादाम और अखरोट खा लें।
  • दोपहर का फलाहार (दोपहर 1 से 2 बजे)- इस समय पेट भरकर पौष्टिक खाना खाएं। जैसे साबूदाने की हल्की खिचड़ी, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की रोटी के साथ लौकी या कद्दू की सब्जी और साथ में थोड़ा सा ताज़ा दही।
  • शाम की भूख (शाम 5 से 6 बजे)- शाम के वक्त हल्की भूख लगती है। इस दौरान आप एक कप ग्रीन टी या भुने हुए मखाने ले सकते हैं। साथ में कोई एक फल जैसे सेब या केला खा लें।
  • रात का खाना (रात 8 से 8:30 बजे)- रात को खाना एकदम हल्का रखें ताकि सोते समय पेट भारी न रहे। एक गिलास गर्म दूध, थोड़े से भुने हुए मखाने या कोई फल लेना काफी रहता है।

उपवास में डाइट कैसी होनी चाहिए?

व्रत में सबसे ज्यादा परेशानी पानी कम पीने से होती है। पानी की कमी होते ही चक्कर आने लगते हैं और सिर भारी हो जाता है। इसलिए दिनभर में थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। आप नीबू पानी, नारियल पानी या पतली छाछ भी पी सकते हैं। कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, समा के चावल और मखाने ऐसी चीज़ें हैं जो धीरे-धीरे पचती हैं। इन्हें खाने से पेट काफी देर तक भरा लगता है और बार-बार बेवजह भूख नहीं लगती। दही, पनीर और दूध शरीर को ताकत देते हैं। वहीं सेब, पपीता, अनार और खीरा जैसे फल पेट को साफ रखते हैं और पाचन सही बनाए रखते हैं।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
13 Oct 2026 07:00 pm