Silent Killer Cancer: ओवेरियन कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शैलजा अग्रवाल से जानिए BEACH फॉर्मूला और इसके 5 अहम संकेत।
Ovarian Cancer Symptoms: ओवेरियन कैंसर को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि ज्यादातर महिलाएं उन्हें गैस, कमजोरी, तनाव या पेट की छोटी-मोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन यही लापरवाही बाद में बड़ी परेशानी बन सकती है।
डॉक्टर शैलजा अग्रवाल (स्त्री रोग विशेषज्ञ) ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि ओवेरियन कैंसर के लक्षणों को पहचानने के लिए BEACH नाम का एक आसान तरीका इस्तेमाल किया जाता है। अगर ये संकेत बार-बार और लगातार दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
कभी-कभार गैस बनने से पेट फूलना सामान्य बात है, लेकिन अगर पेट लगातार फूला हुआ महसूस हो, कपड़े टाइट लगने लगें और डाइट बदलने के बाद भी राहत न मिले, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर अग्रवाल के मुताबिक, ओवेरियन कैंसर में होने वाला ब्लोटिंग धीरे-धीरे बढ़ता जाता है और रोज महसूस होने लगता है।
अगर थोड़ी सी चीज खाने के बाद ही पेट भरा-भरा महसूस होने लगे या भूख कम हो जाए, तो यह भी एक संकेत हो सकता है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पेट में ट्यूमर या फ्लूइड जमा होने से पेट पर दबाव पड़ता है।
पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में लगातार दर्द, भारीपन या खिंचाव महसूस होना भी ओवेरियन कैंसर का संकेत हो सकता है। अगर यह दर्द लगभग रोज होने लगे, तो जांच जरूरी हो जाती है।
बार-बार पेशाब लगना, अचानक कब्ज होना, दस्त लगना या पेट साफ न होने जैसी समस्याएं भी इसके संकेत हो सकते हैं।
कई महिलाएं इन्हें सामान्य पेट की समस्या समझकर अनदेखा कर देती हैं।
अगर बिना ज्यादा काम किए भी हर समय कमजोरी और थकान महसूस हो रही हो और आराम करने के बाद भी शरीर ठीक न लगे, तो इसे हल्के में न लें।
डॉक्टर अग्रवाल बताती हैं कि ओवेरियन कैंसर के लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, इसलिए महिलाएं महीनों तक इन्हें नजरअंदाज करती रहती हैं। दूसरे कैंसर की तरह इसमें शरीर पर कोई गांठ आसानी से दिखाई नहीं देती, क्योंकि ओवरी शरीर के अंदर गहराई में होती है। ऐसे में ट्यूमर काफी बड़ा होने के बाद ही लक्षण साफ नजर आते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।