
Paget’s Disease Symptoms: अक्सर जब किसी को सिरदर्द होता है, तो लोग इसे तनाव, माइग्रेन या चश्मे का नंबर बदलने से जोड़कर देखते हैं। वहीं, अगर उम्र बढ़ने के साथ कानों से कम सुनाई देने लगे, तो इसे बुढ़ापे का सामान्य असर मान लिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लगातार रहने वाला सिरदर्द और कानों से कम सुनाई देना हड्डियों की एक गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है? जी हां, इस बीमारी का नाम है पेजेट्स डिसीज (Paget’s Disease of Bone)। यह हड्डियों की एक ऐसी स्थिति है, जो धीरे-धीरे हड्डियों के ढांचे और उनकी मजबूती को बिगाड़ देती है। आइए समझते हैं कि यह बीमारी क्या है, यह सिरदर्द और सुनने की क्षमता को कैसे प्रभावित करती है और इसके मुख्य लक्षण क्या हैं।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, हमारा शरीर पुरानी और कमजोर हड्डियों को तोड़कर उनकी जगह नई और मजबूत हड्डियां बनाता रहता है। यह एक स्वाभाविक और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। लेकिन जब किसी व्यक्ति को पेजेट्स डिसीज होती है, तो यह पूरी प्रक्रिया गड़बड़ा जाती है। इस बीमारी में शरीर बहुत तेजी से नई हड्डियां बनाने लगता है। जल्दबाजी में बनने के कारण ये नई हड्डियां बहुत कमजोर, नरम और असमान (असामान्य आकार की) होती हैं। इसके कारण हड्डियां आसानी से मुड़ सकती हैं, उनका आकार बड़ा हो सकता है या वे जरा सी चोट में भी टूट सकती हैं। यह बीमारी शरीर की किसी भी हड्डी को प्रभावित कर सकती है, लेकिन आमतौर पर यह खोपड़ी (Skull), रीढ़ की हड्डी, पेल्विस (कूल्हे की हड्डी) और पैरों की हड्डियों में सबसे ज्यादा देखने को मिलती है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आता है कि हड्डियों की बीमारी का सिरदर्द या कानों से क्या लेना-देना? दरअसल, जब पेजेट्स डिसीज आपकी खोपड़ी (Skull) की हड्डियों को प्रभावित करती है, तो खोपड़ी की हड्डियां मोटी और असामान्य रूप से बड़ी होने लगती हैं। खोपड़ी का आकार बढ़ने और हड्डियों के भारी होने से सिर के अंदर दबाव बनता है, जिससे लगातार और तेज सिरदर्द की समस्या रहने लगती है। इसके अलावा, हमारे कानों के अंदर सुनने में मदद करने वाली बहुत बारीक नसें और हड्डियां होती हैं। जब खोपड़ी की हड्डी का आकार असामान्य रूप से बढ़ता है, तो वह कानों तक जाने वाली नसों (Hearing Nerves) को दबाने लगती है। इस दबाव के कारण व्यक्ति को धीरे-धीरे कानों से कम सुनाई देने लगता है और गंभीर मामलों में बहरापन भी हो सकता है। कभी-कभी कानों में सीटी बजने जैसी आवाजें (Tinnitus) भी आने लगती हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।