
जेएएच ब्लड बैंक के बुरे हाल: भवन पूरी तरह जर्जर, थोड़ी सी बारिश होते ही छत से टपकने लगता पानी
ग्वालियर . जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) में संचालित अंचल के सबसे बड़े ब्लड बैंक की बदहाली किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। स्थिति यह है कि वर्षों से इस महत्वपूर्ण इमारत का मेंटेनेंस नहीं कराया गया है, भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। थोड़ी सी बारिश होते ही छत से पानी टपकने लगता है, जिससे खून के स्टोरेज और जरूरी दस्तावेजों को बचाना कर्मचारियों के लिए चुनौती बन जाता है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि 10 लाख रुपए का मेंटनेंस बजट फिलहाल कागजों में ही अटका हुआ है। इस बारिश के दिनों में यहां पर काफी परेशानी आ रही है।
निजी अस्पतालों का लोड, हर दिन 90 से अधिक लोग पहुंचते
यह ब्लड बैंक सिर्फ सरकारी जेएएच अस्पताल के मरीजों का ही नहीं, बल्कि ग्वालियर-चंबल अंचल के तमाम निजी अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों, हादसों के घायलों और प्रसूताओं के लिए भी जीवन रेखा है। संभाग भर से रोजाना 90 से अधिक लोग खून की आस लेकर इसी खस्ताहाल और जोखिम भरी इमारत में पहुंचते हैं। लेकिन वर्षों से मेंटेनेंस न होने के कारण यहां की व्यवस्थाएं खुद दम तोड़ रही हैं।
दो साल से फाइलों में कैद शिफ्टिंग की योजना
प्रशासनिक सुस्ती का आलम यह है कि ब्लड बैंक के सुधार कार्य के लिए पिछले दो साल से फाइलें दौड़ रही हैं। इसे पुराने कैंसर वार्ड में शिफ्ट करने की योजना लंबे समय से कागजों तक ही सीमित है। पीडब्ल्यूडी द्वारा नया प्रस्ताव भेजे जाने और स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एसबीटीसी) से 10 लाख रुपए का बजट जल्द मिलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर अब तक कोई सुधार नहीं हुआ है। इससे आने वाले लोगों को काफी परेशानी के बीच अपना ब्लड देकर दूसरे ग्रुप का ब्लड लेना पड़ता है।
इस सप्ताह राशि आने की उम्मीद
&जेएएच की ब्लड बैंक के मेंटेनेंस को लेकर काफी समय से प्रयास किए जा रहे हैं। अभी हाल ही में इसके मेंटनेंस के लिए स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एसवीटीसी) से 10 लाख रुपए मंजूर हो गए हैं। यह राशि इस सप्ताह आने की उम्मीद है। इसके बाद मेंटेनेंस का काम शुरू हो जाएगा। जिससे यहां पर आने वाले मरीजों को काफी राहत मिलने लगेगी।
डॉ. मनीष चतुर्वेदी, प्रवक्ता, जीआरएमसी
Updated on:
07 Sept 2026 06:40 pm
Published on:
07 Sept 2026 06:40 pm
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