
Palatal Expander Hindi: क्या आपके बच्चे के नए दांत आते ही आपस में टकराने लगे हैं या ऊपर-नीचे टेढ़े-मेढ़े निकल रहे हैं? माता-पिता इसे समय की बात मानकर टाल देते हैं कि बड़े होने पर ब्रासेस (Braces) लगवा देंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर बच्चे के ऊपरी जबड़े में चौड़ाई ही कम हो, तो केवल ब्रासेस लगाने से बात नहीं बनती? ऐसे में जबड़े की सही ग्रोथ और दांतों को सीधी जगह देने के लिए पैलेटल एक्सपेंडर (Palatal Expander) असरदार मेडिकल टूल माना जाता है।
बच्चों में दांतों की क्राउडिंग (जगह की कमी) या गलत बाइट (Crossbite) को शुरुआत में ही ठीक करना आसान होता है। देखा जाता है कि माता-पिता इस डिवाइस का नाम सुनते ही घबरा जाते हैं कि कहीं इससे बच्चे को बहुत दर्द तो नहीं होगा। इसमें डरने की बिल्कुल बात नहीं है। पैलेटल एक्सपेंडर बच्चों के लिए एक बेहद सुरक्षित और दर्दरहित ऑर्थोडॉन्टिक उपचार है। उम्र रहते जबड़े को सही आकार दे दिया जाए, तो भविष्य में न तो दांत उखाड़ने की नौबत आती है और न ही महंगी सर्जिकल प्रक्रियाओं की। आइए, समझते हैं कि यह पैलेटल एक्सपेंडर असल में क्या है और यह आपके बच्चे की मुस्कान कैसे सुधार सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, पैलेटल एक्सपेंडर एक कस्टम-मेड ऑर्थोडॉन्टिक डिवाइस है, जिसे बच्चे के ऊपरी जबड़े (Maxilla) को चौड़ा करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। जब किसी बच्चे का ऊपरी जबड़ा काफी संकरा (Narrow) होता है, तो नए पक्के दांतों के लिए मसूड़ों में पर्याप्त जगह नहीं बचती। इसके कारण दांत एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने लगते हैं। देखा जाए तो यह डिवाइस मुख्य रूप से तीन बड़ी समस्याओं को ठीक करता है;
अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ ऑर्थोडॉन्टिस्ट्स (AAO) और की मेडिकल गाइडलाइंस के मुताबिक, पैलेटल एक्सपेंडर बच्चे के तालू (Palate) यानी मुंह के ऊपरी हिस्से में लगाया जाता है और यह ऊपरी दाढ़ों (Molars) से जुड़ा रहता है। इसके काम करने का तरीका बेहद दिलचस्प और वैज्ञानिक है, बच्चों के ऊपरी जबड़े की हड्डी दो हिस्सों में बंटी होती है, जो बीच में एक सुचर (Suture) से जुड़ी होती है। बचपन में यह जोड़ बहुत नरम और लचीला होता है। इस डिवाइस के बीच में एक छोटा सा स्क्रू लगा होता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार, माता-पिता को रोजाना एक खास चाबी (Key) की मदद से इस स्क्रू को हल्का सा घुमाना होता है। स्क्रू घुमाने से जबड़े के दोनों हिस्सों पर बहुत हल्का और लगातार दबाव पड़ता है, जिससे जबड़ा धीरे-धीरे चौड़ा होने लगता है। जब दोनों हिस्से थोड़े अलग होते हैं, तो वहां कुदरती रूप से नई हड्डी बन जाती है। राहत की बात यह है कि इस प्रक्रिया में बच्चे को तीखा दर्द नहीं होता, केवल शुरुआत के 2-3 दिनों तक हल्का खिंचाव महसूस होता है।
मेडिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो पैलेटल एक्सपेंडर का इस्तेमाल सबसे ज्यादा 7 से 12 साल की उम्र के बच्चों में होता है। इस उम्र में बच्चों की हड्डियों की ग्रोथ चल रही होती है, इसलिए जबड़े को आकार देना सबसे आसान होता है। 13-14 साल की उम्र के बाद यह सुचर हड्डी में बदलकर सख्त हो जाता है, जिसके बाद इसे बिना सर्जरी के चौड़ा करना मुश्किल हो जाता है। अगर आपके बच्चे में ये लक्षण दिखें, तो ऑर्थोडॉन्टिस्ट इसे रिकमेंड कर सकते हैं;
भारत में पैलेटल एक्सपेंडर के इलाज का खर्च शहर, क्लिनिक और इस्तेमाल किए जा रहे एक्सपेंडर के प्रकार (Fixed या Removable) पर निर्भर करता है। अमूमन भारतीय डेंटल क्लिनिक्स में पैलेटल एक्सपेंडर की लागत ₹15,000 से लेकर ₹35,000 तक आ सकती है। अगर इसके बाद ब्रासेस (Braces) की भी जरूरत पड़ती है, तो कुल ट्रीटमेंट पैकेज का खर्च अलग से तय होता है। सही और सटीक जानकारी के लिए हमेशा किसी सर्टिफाइड ऑर्थोडॉन्टिस्ट से ही परामर्श लें।