mRNA Vaccine: पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में mRNA वैक्सीन ने दिखाई नई उम्मीद। रिसर्च में कई मरीज 6 साल तक जिंदा रहे। जानें कैसे काम करती है यह नई थेरेपी।
mRNA Vaccine: पैंक्रियाटिक कैंसर, यानी Pancreatic Cancer, को सबसे खतरनाक कैंसर में गिना जाता है। इसमें मरीजों के बचने की संभावना बहुत कम होती है। लेकिन अब एक नई रिसर्च ने उम्मीद की किरण दिखाई है। Memorial Sloan Kettering Cancer Center के वैज्ञानिकों ने एक पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन तैयार की है, जिसने कई मरीजों को 6 साल तक जिंदा रहने में मदद की है। यह इस बीमारी में बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
72 साल की डोना गुस्टाफसन को अचानक पीलिया हुआ, जिसके बाद जांच में पता चला कि उन्हें स्टेज-2 पैंक्रियाटिक कैंसर है।सर्जरी के बाद उन्होंने इस नई वैक्सीन के ट्रायल में हिस्सा लिया। आज कई साल बाद भी वे कैंसर-फ्री हैं। यह दिखाता है कि सही समय पर इलाज और नई तकनीक कितनी असरदार हो सकती है।
पैंक्रियाटिक कैंसर से बचना मुश्किल इसलिए होता है क्योंकि इसका जल्दी पता नहीं चलता। लक्षण बहुत देर से दिखते हैं। सिर्फ 20% मरीजों में ही ऑपरेशन संभव होता है। इसी वजह से इसका 5 साल का सर्वाइवल रेट 13% से भी कम है।
यह वैक्सीन Immunotherapy पर आधारित है। यानी यह शरीर की इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर कैंसर से लड़ने में मदद करती है। प्रोसेस आसान भाषा में समझें:
Nature जर्नल में पब्लिश इस स्टडी के मुताबिक करीब 50% मरीजों में मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स देखा गया। जो मरीज रिस्पॉन्ड कर पाए, उनमें से लगभग 90% लंबे समय तक जिंदा रहे। कई मरीज 6 साल बाद भी कैंसर-फ्री हैं। इस वैक्सीन से शरीर में किलर T-Cells और हेल्पर T-Cells एक्टिव होते हैं, जो कैंसर को खत्म करने और दोबारा आने से रोकने में मदद करते हैं।
पहले कैंसर वैक्सीन ज्यादा असरदार नहीं थीं, खासकर एडवांस स्टेज में। लेकिन इस नई रिसर्च से पता चला है कि अगर सर्जरी के बाद शुरुआती स्टेज में वैक्सीन दी जाए, तो ज्यादा फायदा हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए BioNTech और Genentech जैसी कंपनियां अब बड़े ट्रायल (Phase 2) कर रही हैं।
यह mRNA वैक्सीन अभी शुरुआती स्टेज में है, लेकिन इसके रिजल्ट काफी उम्मीद देने वाले हैं। पैंक्रियाटिक कैंसर जैसे मुश्किल रोग में जहां पहले बहुत कम विकल्प थे, अब यह नई तकनीक मरीजों को लंबी जिंदगी और बेहतर क्वालिटी ऑफ लाइफ दे सकती है। हालांकि, यह अभी पूरी तरह से आम इलाज का हिस्सा नहीं बनी है, इसलिए किसी भी फैसले से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।