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mRNA Vaccine: कोविड वैक्सीन के बाद दिल में सूजन क्यों? स्टडी ने खोला बड़ा राज

mRNA कोविड वैक्सीन के बाद दिल की सूजन के दुर्लभ मामलों पर स्टैनफोर्ड स्टडी। जानिए कारण, खतरा कितना है और सेहत के लिए क्या सीख।

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भारत

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Dimple Yadav

Jan 03, 2026

mRNA Vaccine

mRNA Vaccine (Photo- gemini ai)

mRNA Vaccine: कोविड-19 से बचाव में mRNA वैक्सीन ने पूरी दुनिया में लाखों जिंदगियां बचाई हैं। Pfizer और Moderna की इन वैक्सीन की वजह से गंभीर संक्रमण, अस्पताल में भर्ती और मौत के मामलों में भारी कमी आई है। हाल ही में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी ने यह समझने की कोशिश की कि कुछ बहुत ही दुर्लभ मामलों में वैक्सीन लेने के बाद युवाओं, खासकर लड़कों में, दिल की सूजन यानी मायोकार्डाइटिस क्यों देखी गई।

पहले साफ समझ लें: वैक्सीन सुरक्षित है

स्टडी में यह बात दोहराई गई है कि mRNA वैक्सीन बेहद सुरक्षित और असरदार हैं। मायोकार्डाइटिस का खतरा बहुत कम लोगों में देखा गया है। आंकड़ों के अनुसार, यह जोखिम हजारों में एक के बराबर है। वहीं, अगर किसी को कोविड हो जाए, तो संक्रमण के बाद दिल में सूजन का खतरा वैक्सीन के मुकाबले करीब 10 गुना ज्यादा होता है। यानी सेहत के लिहाज से वैक्सीन लगवाना कहीं ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।

शरीर के अंदर क्या प्रक्रिया होती है?

स्टैनफोर्ड के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह समस्या इम्यून सिस्टम की एक खास प्रतिक्रिया से जुड़ी है। हमारे शरीर में मैक्रोफेज नाम की कोशिकाएं होती हैं, जो संक्रमण से लड़ने की पहली दीवार हैं। जब ये कोशिकाएं mRNA वैक्सीन के संपर्क में आती हैं, तो वे एक सिग्नल प्रोटीन छोड़ती हैं, जिससे दूसरी इम्यून कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं।

कुछ मामलों में यह प्रतिक्रिया जरूरत से ज्यादा तेज हो जाती है। तब दिल के आसपास ज्यादा इम्यून कोशिकाएं जमा हो जाती हैं और हल्की सूजन पैदा हो सकती है। यही सूजन कुछ युवाओं में सीने में दर्द या सांस की तकलीफ का कारण बनती है। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में यह सूजन अपने आप ठीक हो जाती है और दिल को कोई स्थायी नुकसान नहीं पहुंचता।

क्यों ज्यादा असर युवाओं और लड़कों में?

रिसर्च के अनुसार, हार्मोन भी इसमें भूमिका निभाते हैं। एस्ट्रोजन हार्मोन सूजन को कम करने में मदद करता है। लड़कों में एस्ट्रोजन का स्तर कम होने की वजह से यह इम्यून प्रतिक्रिया थोड़ी ज्यादा हो सकती है, इसलिए किशोर और युवा पुरुषों में यह असर ज्यादा देखा गया।

सोया से मिलने वाला सुरक्षा संकेत

इस स्टडी की एक अहम खोज यह रही कि सोया में पाया जाने वाला प्राकृतिक तत्व जेनिस्टीन इम्यून सिस्टम की इस तेज प्रतिक्रिया को शांत कर सकता है। लैब और जानवरों पर हुए प्रयोगों में जेनिस्टीन ने दिल की सूजन, कोशिकाओं के नुकसान और हार्ट एंजाइम के बढ़ने को कम किया। यह संकेत देता है कि भविष्य में वैक्सीन को और सुरक्षित बनाने या दिल की सुरक्षा के लिए इस तरह के तत्वों पर काम किया जा सकता है।

सेहत के लिए संदेश

इस पूरी रिसर्च का सबसे बड़ा मैसेज यह है कि वैक्सीन का फायदा किसी भी संभावित जोखिम से कहीं ज्यादा है। सीने में दर्द, सांस की दिक्कत या बेचैनी हो तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। वैज्ञानिक लगातार वैक्सीन को और सुरक्षित बनाने में जुटे हैं। कुल मिलाकर, कोविड से बचाव के लिए वैक्सीन आज भी सबसे मजबूत और सुरक्षित उपाय है, और नई रिसर्च से भविष्य में इसकी सुरक्षा और बेहतर होने की उम्मीद है।