पीरियड्स (Periods) या मासिक धर्म (Menstruation) होना हर महिला के जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है. लेकिन आज भी इस बारे में खुलकर बात नहीं की जाती और कई तरह की गलतफहमियां हैं
कई बार पीरियड्स (Periods) की बात करना भी हमारे समाज में एक वर्जना जैसा लगता है। ये बातें अक्सर छिपाई जाती हैं या इनके बारे में खुलेआम बात नहीं की जाती। लेकिन क्या आपको पता है कि पीरियड्स (Periods) होना एक स्वस्थ महिला होने की निशानी है? जी हां, पीरियड्स (Periods) महिलाओं के शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलाव का हिस्सा है।
तो फिर पीरियड्स (Periods) को लेकर इतनी शर्म या घबराहट क्यों? आज हम पीरियड पावर (Period Power) की बात कर रहे हैं, यानी पीरियड्स को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करना और उन्हें एक सकारात्मक नजरिए से देखना।
पीरियड पावर (Period Power) का मतलब है अपने पीरियड्स को समझना और उनका सम्मान करना। इसका मतलब ये भी है कि पीरियड्स के दौरान होने वाले बदलावों को स्वीकार करना और उन्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करना। पीरियड पावर इस धारणा को तोड़ने की कोशिश है कि पीरियड्स कमजोरी की निशानी हैं।
हर महिला का शरीर अलग होता है और हर किसी का पीरियड्स का अनुभव भी अलग हो सकता है। किसी को ज्यादा दर्द होता है तो किसी को कम। किसी का पीरियड्स नियमित होता है तो किसी का अनियमित। ये सब नॉर्मल है!
पीरियड पावर (Period Power) महिलाओं को ये ताकत देता है कि वो अपने शरीर को बेहतर तरीके से समझ सकें। इससे उन्हें ये पता चलता है कि उनका शरीर कैसे काम करता है और पीरियड्स के दौरान उन्हें किन चीजों की जरूरत होती है। साथ ही, पीरियड पावर इस मिथक को तोड़ने में भी मदद करता है कि पीरियड्स अशुद्धता का प्रतीक हैं।
जब पीरियड्स को लेकर खुलेआम बात होगी तो महिलाओं को पीरियड्स से जुड़ी परेशानियों के बारे में भी खुलकर बात करने में आसानी होगी। इससे ये भी पता चल सकेगा कि क्या पीरियड्स से जुड़ी कोई समस्या है जिसके लिए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
याद रखें, पीरियड्स कमजोरी नहीं बल्कि ताकत की निशानी हैं। पीरियड पावर अपनाएं और अपने शरीर को समझें!