
Pityriasis Rosea Symptoms: क्या आपकी त्वचा पर अचानक एक बड़ा सा लाल या गुलाबी रंग का चकत्ता (Patch) उभर आया है और उसके कुछ ही दिनों बाद पूरे पीठ, पेट या छाती पर छोटे-छोटे दाने फैलने लगे हैं? अगर ऐसा है, तो इसे सिर्फ सामान्य एलर्जी या मौसम का असर मानकर टालने की भूल न करें। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी एसोसिएशन (American Academy of Dermatology Association - AAD) के अनुसार, यह लक्षण पिटिरियासिस रोजिया (Pityriasis Rosea) नाम की त्वचा संबंधी बीमारी का हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जो देखने में डरावनी लग सकती है, लेकिन अच्छी बात यह है कि यह आमतौर पर अपने आप ही ठीक हो जाती है। आइए समझते हैं कि यह बीमारी क्या है, क्यों होती है और इससे राहत पाने के लिए क्या करना चाहिए।
पिटिरियासिस रोजिया एक तरह का स्किन रैश (त्वचा का दाना या दाद जैसी समस्या) है। यह ज्यादातर 10 से 35 साल की उम्र के लोगों और युवाओं में देखने को मिलता है। इसकी सबसे अनोखी पहचान यह है कि यह शरीर पर एक बड़े मातृ चकत्ते (Herald Patch) से शुरू होता है। यानी पहले पेट, पीठ या छाती पर एक बड़ा सा लाल, गुलाबी या ओवल (अंडे के आकार का) दाना बनता है। इसके कुछ दिन या हफ्ते बाद शरीर के बाकी हिस्सों में छोटे-छोटे दानों का झुंड फैल जाता है। पीठ पर ये दाने इस तरह फैलते हैं कि उनका आकार क्रिसमस ट्री (Christmas Tree) जैसा दिखाई देने लगता है।
मेयो क्लिनिक की रिसर्च के मुताबिक, पिटिरियासिस रोजिया का सटीक कारण अभी तक पूरी तरह से साफ नहीं है। यह ह्यूमन हर्पीस वायरस (Human Herpes Virus - HHV-6 या HHV-7) के एक खास स्ट्रेन की वजह से ट्रिगर होता है। अच्छी बात यह है कि यह कोई छुआछूत (Contagious) की बीमारी नहीं है। यानी यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में छूने, कपड़े शेयर करने या साथ रहने से नहीं फैलती।
अगर आपको पिटिरियासिस रोजिया की शिकायत है, तो आपको ये लक्षण महसूस हो सकते हैं;
वैसे तो यह रैश 6 से 8 हफ्तों के भीतर अपने आप गायब हो जाता है और ज्यादातर मामलों में किसी बड़ी दवा की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन आपको डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा विशेषज्ञ) से सलाह जरूर लेनी चाहिए अगर;
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।