स्वास्थ्य

Postural Tachycardia Syndrome: बैठने या लेटने के बाद खड़े होते ही कुछ लोगों का दिल क्यों तेज धड़कने लगता है? Cleveland Clinic से जानें

Postural Tachycardia Syndrome Cause: खड़े होते ही दिल तेज धड़कने लगे और चक्कर आएं? क्लीवलैंड क्लिनिक और एनएचएस से जानिए POTS सिंड्रोम के लक्षण, कारण, जांच और इलाज के बारे में जरुरी बातें।
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Updated: 4 Nov 2026, 7:00 PM IST
टैकीकार्डिया के दौरान दिल की धड़कन तेज होने से बेचैनी महसूस करती युवती।
बिना किसी शारीरिक मेहनत के भी दिल की धड़कन तेज होना टैकीकार्डिया का संकेत हो सकता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- chatgpt)

Postural Tachycardia Syndrome: आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि सुबह बिस्तर से उठे और अचानक सीने में धक-धक होने लगी। सिर हल्का लगने लगा, आंखों के आगे अंधेरा सा छा गया। एक-दो बार हो तो हम इसे कमजोरी या थकान मानकर टाल देते हैं। लेकिन ये समस्या आपके साथ बार-बार होने लगे, तो POTS भी हो सकता है। Postural Tachycardia Syndrome में लेटने या बैठने के बाद खड़े होते ही दिल की धड़कन जरूरत से ज्यादा तेज हो जाती है। आइए जानते हैं कि ये क्या होता है, इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय क्या हैं?

क्या होता है POTS (Postural Tachycardia Syndrome) ?

क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, इसका पूरा नाम है पोस्चरल ऑर्थोस्टैटिक टैकीकार्डिया सिंड्रोम। शरीर की पोजिशन बदलते ही धड़कन 100 प्रति मिनट से ऊपर चली जाती है। आम तौर पर हमारा ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम नसों को सिकोड़कर और धड़कन को संभालकर खून का बहाव एक जैसा रखता है, चाहे हम लेटे हों या खड़े। POTS में यह तालमेल गड़बड़ा जाता है। नतीजा यह कि दिमाग और बाकी अंगों तक खून की सप्लाई डगमगाने लगती है। अकेले अमेरिका में पांच लाख से ज्यादा लोग इससे जूझ रहे हैं। ज्यादातर मरीज 15 से 50 साल की महिलाएं हैं, पर पुरुषों को भी यह हो सकता है।

कौन से लक्षण बिलकुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

  • दिमाग में धुंध-सी छाना (ब्रेन फॉग) और लगातार थकान।
  • सांस फूलना और सीने में दर्द।
  • पसीना, घबराहट और हाथ-पैरों का नीला-बैंगनी पड़ना।
  • सिरदर्द, पेट फूलना और बिगड़ी हुई नींद।

POTS के कारण क्या-क्या हैं?

NHS (एनएचएस) के अनुसार, पोस्चुरल टैकीकार्डिया सिंड्रोम (PoTS) के कारण स्पष्ट नहीं हैं। कहीं नसों में खून जमा होता है, कहीं फाइट-ऑर-फ्लाइट वाला सिस्टम ज्यादा सक्रिय रहता है, और कहीं शरीर में खून की मात्रा ही कम होती है। कुछ अध्ययन इसे ऑटोइम्यून या जेनेटिक कारणों से भी जोड़ते हैं। परिवार में किसी को POTS होना, लुपस, सीलिएक जैसी ऑटोइम्यून बीमारियां और हाइपरमोबाइल एहलर्स-डैनलोस सिंड्रोम इसका जोखिम बढ़ाते हैं। कई बार कोविड या मोनोन्यूक्लिओसिस जैसा वायरल इन्फेक्शन, प्रेग्नेंसी, सर्जरी या सिर की चोट के बाद भी यह शुरू हो जाता है।

जांच और इलाज कैसे होता है?

Postural Tachycardia Syndrome के लक्षण इतने अलग-अलग होते हैं कि डायग्नोसिस में महीनों, कभी-कभी सालों लग जाते हैं। मुख्य जांच टिल्ट टेबल टेस्ट है, जिसमें पोजीशन बदलने पर धड़कन और ब्लड प्रेशर नापे जाते हैं। इसके साथ खून-पेशाब की जांच भी हो सकती है ताकि दूसरी बीमारियां बाहर की जा सकें। POTS का पक्का इलाज नहीं है, लेकिन लक्षण काफी हद तक संभाले जा सकते हैं;

  • तैराकी, रोइंग या रिक्लाइन साइकिल जैसी लेटकर होने वाली कसरतें सबसे फायदेमंद मानी गई हैं।
  • लेटे से पहले बैठें, कुछ मिनट रुकें, फिर खड़े हों।
  • दिन में दो-तीन भारी भोजन की जगह छोटे-छोटे कई भोजन लें।
  • रोज 2 से 2.5 लीटर पानी पिएं और शराब से दूर रहें।
  • पूरे पलंग का सिरा 6 से 10 इंच ऊंचा रखने से सुबह उठना आसान हो सकता है।
  • इससे पैरों से खून ऊपर चढ़ाने में मदद मिलती है।

खास तौर पर कम खून वाले मरीजों को डॉक्टर नमक बढ़ाने की सलाह दे सकते हैं, पर यह खुद से न करें। ब्लड प्रेशर, दिल या किडनी की दिक्कत वाले लोगों के लिए यह ठीक नहीं है। क्लीवलैंड क्लिनिक का कहना है कि POTS के लिए FDA ने कोई दवा मंजूर नहीं की है, फिर भी डॉक्टर लक्षण देखकर कुछ दवाएं देते हैं।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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