
Postural Tachycardia Syndrome: आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि सुबह बिस्तर से उठे और अचानक सीने में धक-धक होने लगी। सिर हल्का लगने लगा, आंखों के आगे अंधेरा सा छा गया। एक-दो बार हो तो हम इसे कमजोरी या थकान मानकर टाल देते हैं। लेकिन ये समस्या आपके साथ बार-बार होने लगे, तो POTS भी हो सकता है। Postural Tachycardia Syndrome में लेटने या बैठने के बाद खड़े होते ही दिल की धड़कन जरूरत से ज्यादा तेज हो जाती है। आइए जानते हैं कि ये क्या होता है, इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय क्या हैं?
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, इसका पूरा नाम है पोस्चरल ऑर्थोस्टैटिक टैकीकार्डिया सिंड्रोम। शरीर की पोजिशन बदलते ही धड़कन 100 प्रति मिनट से ऊपर चली जाती है। आम तौर पर हमारा ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम नसों को सिकोड़कर और धड़कन को संभालकर खून का बहाव एक जैसा रखता है, चाहे हम लेटे हों या खड़े। POTS में यह तालमेल गड़बड़ा जाता है। नतीजा यह कि दिमाग और बाकी अंगों तक खून की सप्लाई डगमगाने लगती है। अकेले अमेरिका में पांच लाख से ज्यादा लोग इससे जूझ रहे हैं। ज्यादातर मरीज 15 से 50 साल की महिलाएं हैं, पर पुरुषों को भी यह हो सकता है।
NHS (एनएचएस) के अनुसार, पोस्चुरल टैकीकार्डिया सिंड्रोम (PoTS) के कारण स्पष्ट नहीं हैं। कहीं नसों में खून जमा होता है, कहीं फाइट-ऑर-फ्लाइट वाला सिस्टम ज्यादा सक्रिय रहता है, और कहीं शरीर में खून की मात्रा ही कम होती है। कुछ अध्ययन इसे ऑटोइम्यून या जेनेटिक कारणों से भी जोड़ते हैं। परिवार में किसी को POTS होना, लुपस, सीलिएक जैसी ऑटोइम्यून बीमारियां और हाइपरमोबाइल एहलर्स-डैनलोस सिंड्रोम इसका जोखिम बढ़ाते हैं। कई बार कोविड या मोनोन्यूक्लिओसिस जैसा वायरल इन्फेक्शन, प्रेग्नेंसी, सर्जरी या सिर की चोट के बाद भी यह शुरू हो जाता है।
Postural Tachycardia Syndrome के लक्षण इतने अलग-अलग होते हैं कि डायग्नोसिस में महीनों, कभी-कभी सालों लग जाते हैं। मुख्य जांच टिल्ट टेबल टेस्ट है, जिसमें पोजीशन बदलने पर धड़कन और ब्लड प्रेशर नापे जाते हैं। इसके साथ खून-पेशाब की जांच भी हो सकती है ताकि दूसरी बीमारियां बाहर की जा सकें। POTS का पक्का इलाज नहीं है, लेकिन लक्षण काफी हद तक संभाले जा सकते हैं;
खास तौर पर कम खून वाले मरीजों को डॉक्टर नमक बढ़ाने की सलाह दे सकते हैं, पर यह खुद से न करें। ब्लड प्रेशर, दिल या किडनी की दिक्कत वाले लोगों के लिए यह ठीक नहीं है। क्लीवलैंड क्लिनिक का कहना है कि POTS के लिए FDA ने कोई दवा मंजूर नहीं की है, फिर भी डॉक्टर लक्षण देखकर कुछ दवाएं देते हैं।