
Prediabetes Symptoms: हेल्थ चेकअप में कई लोगों की रिपोर्ट में लिखा आता है, प्रीडायबिटीज। अक्सर लोग सोचते हैं कि अभी डायबिटीज नहीं हुई है, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं। लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यही वह समय होता है जब सही कदम उठाकर आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को कम किया जा सकता है।
Mayo Clinic के अनुसार, प्रीडायबिटीज ऐसी स्थिति है जिसमें ब्लड शुगर सामान्य से अधिक होती है, लेकिन इतनी नहीं कि उसे डायबिटीज कहा जाए। वहीं National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) का कहना है कि इस अवस्था में शरीर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है।
समस्या यह है कि अधिकांश लोगों में प्रीडायबिटीज के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। फिर भी कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें लोग अक्सर थकान, तनाव या बढ़ती उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
अगर पर्याप्त आराम के बाद भी दिनभर कमजोरी या थकान बनी रहती है, तो यह सिर्फ व्यस्त दिनचर्या का असर नहीं हो सकता। बढ़ा हुआ ब्लड शुगर स्तर शरीर की ऊर्जा के उपयोग को प्रभावित कर सकता है।
बार-बार प्यास लगना और सामान्य से ज्यादा पानी पीने की इच्छा बढ़ना भी बढ़े हुए ब्लड शुगर का संकेत हो सकता है।
जब रक्त में शुगर का स्तर बढ़ता है, तो शरीर अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है। इससे बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है।
Mayo Clinic के अनुसार, ब्लड शुगर बढ़ने पर आंखों के लेंस पर असर पड़ सकता है, जिससे कुछ समय के लिए धुंधला दिखाई देना शुरू हो सकता है।
NIDDK के अनुसार, कुछ लोगों में गर्दन, बगल या शरीर की सिलवटों वाली जगहों की त्वचा मोटी और गहरे रंग की हो सकती है। इसे एकांथोसिस निग्रिकन्स कहा जाता है और यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है।
खाना खाने के बाद भी जल्दी भूख लगना या बार-बार कुछ खाने का मन करना भी शरीर में ग्लूकोज के सही उपयोग न होने का संकेत हो सकता है।
कमर और पेट के आसपास लगातार चर्बी बढ़ना प्रीडायबिटीज का लक्षण नहीं, लेकिन एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक माना जाता है। मोटापा, खासकर पेट की चर्बी, इंसुलिन रेजिस्टेंस की संभावना बढ़ा सकती है।
Mayo Clinic और NIDDK के अनुसार, यदि आपका वजन अधिक है, परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, शारीरिक गतिविधि कम है, हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल है, तो प्रीडायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे लोगों को समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।