
वेंटिलेटर कोई इलाज नहीं है, बल्कि एक ऐसी मददगार मशीन है जो मरीज को ठीक होने के लिए थोड़ा समय देती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Ventilator Means Hindi: अस्पताल में या किसी फिल्म में जब भी हम सुनते हैं कि कोई मरीज वेंटिलेटर पर है, तो सीधे दिल में एक डर बैठ जाता है। ज्यादातर लोग वेंटिलेटर पर जाने का मतलब यह समझ लेते हैं कि अब बंदा बचने नहीं वाला। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वेंटिलेटर कोई इलाज नहीं है, बल्कि एक ऐसी मददगार मशीन है जो मरीज को ठीक होने के लिए थोड़ा समय देती है? जब किसी इंसान के फेफड़े इतने बीमार हो जाते हैं कि वे खुद से सांस नहीं ले पाते, तब यह मशीन उसकी सांसें चलाने का जिम्मा उठा लेती है। आइए जानते हैं कि यह मशीन आखिर करती क्या है और इसकी जरूरत कब और क्यों पड़ती है।
वेंटिलेटर एक सांस देने वाली मशीन है। जब कोई मरीज इतना बीमार हो जाता है कि वह खुद से सांस लेकर अपने शरीर में ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पाता, तब वेंटिलेटर उसके काम को अपने हाथ में ले लेता है। यह मशीन मुख्य रूप से दो बड़े काम करती है;
1. फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाना- यह मशीन मरीज के फेफड़ों तक साफ हवा (ऑक्सीजन) को पंप करके अंदर भेजती है।
2. गंदी हवा बाहर निकालना- यह फेफड़ों में जमा होने वाली कार्बन डाइऑक्साइड (गंदी और जहरीली हवा) को बाहर खींचने में मदद करती है।
वेबएमडी के अनुसार, जब किसी मरीज का रेस्पिरेटरी फेलियर (Respiratory Failure) हो जाता है, यानी उसके फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं, तब उसे वेंटिलेटर पर रखा जाता है। इसकी वजहें ये हैं कि गंभीर निमोनिया या कोविड-19 के कारण जब फेफड़ों में बहुत ज्यादा इंफेक्शन फैल जाता है और वे सूज जाते हैं। अस्थमा का खतरनाक अटैक या किसी हादसे में दिमाग या छाती को गंभीर चोट पहुंचे, जिससे सांस लेने में कठिनाई आए। जब किसी का बड़ा ऑपरेशन (जैसे ओपन हार्ट सर्जरी) होता है, तो डॉक्टर मरीज को बेहोश करने की दवा देते हैं। उस दौरान मरीज खुद से सांस नहीं ले पाता, इसलिए अस्थाई रूप से वेंटिलेटर लगाया जाता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, मरीज को वेंटिलेटर पर रखने के दो तरीके होते हैं, पहला नॉन-इनवेसिव (बिना नली के) जिसमें मरीज के मुंह या नाक पर एक टाइट मास्क लगा दिया जाता है, जिसके जरिए मशीन हवा को फेफड़ों में धकेलती है। यह तब होता है जब दिक्कत थोड़ी कम गंभीर हो। दूसरा इनवेसिव (नली डालकर), जब मरीज की हालत बहुत गंभीर होती है, तो डॉक्टर उसके मुंह या गले के रास्ते सांस की नली में एक प्लास्टिक की नली (Endotracheal tube) डालते हैं। इस पाइप का दूसरा सिरा वेंटिलेटर मशीन से जुड़ा होता है। इस प्रक्रिया के दौरान मरीज को सुलाने या दर्द कम करने की दवाएं दी जाती हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
09 Jul 2026 03:30 pm
