
बुखार आने के बाद आपका बीपी अचानक गिर रहा है तो यह सेप्टिक शॉक हो सकता है।- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Septic Shock Symptoms: हम सबको कभी न कभी तेज बुखार आता है, और हम पेरासिटामोल खाकर आराम करने लगते हैं। ज्यादातर मामलों में बुखार ठीक भी हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी किसी गंभीर इंफेक्शन (संक्रमण) की वजह से शरीर में एक ऐसी स्थिति बन जाती है जो जानलेवा हो सकती है? मेडिकल की दुनिया में इसे सेप्टिक शॉक (Septic Shock) कहते हैं। एनसीबीआइ और मेयो क्लिनिक के अनुसार, यह तब होता है जब शरीर का इंफेक्शन इतना बढ़ जाता है कि ब्लड प्रेशर एकदम से गिर जाता है। आइए समझते हैं कि बुखार के बाद वो कौन से 5 बड़े इशारे हैं, जिन्हें देखते ही तुरंत अस्पताल भागना चाहिए।
जब हमारे शरीर में कोई बैक्टीरिया या वायरस हमला करता है, तो हमारी इम्यूनिटी उससे लड़ती है। लेकिन कभी-कभी यह इंफेक्शन खून में फैल जाता है जिसे सेप्सिस कहते हैं। जब यह स्थिति बहुत ज्यादा बिगड़ जाती है, तो शरीर के अंगों (जैसे दिल, फेफड़े, किडनी) तक खून और ऑक्सीजन पहुंचना लगभग बंद हो जाता है और ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा नीचे गिर जाता है। इसी खतरनाक स्टेज को सेप्टिक शॉक कहते हैं। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें बिना वक्त गंवाए इलाज की जरूरत होती है।
अगर बुखार आने के बाद या बुखार के दौरान किसी मरीज में ये 5 बदलाव दिखें, तो इसे मामूली कमजोरी समझने की भूल बिल्कुल न करें;
1. ब्लड प्रेशर का एकदम से गिर जाना (Low BP)- सेप्टिक शॉक का सबसे बड़ा लक्षण यही है। मरीज का बीपी इतना कम हो जाता है कि दवा देने के बाद भी आसानी से ऊपर नहीं आता। इसके कारण मरीज को बहुत ज्यादा चक्कर आने लगते हैं।
2. सांस का बहुत तेज चलना- अगर मरीज बिना किसी मेहनत के, बैठे-बैठे भी बहुत तेजी से और छोटी-छोटी सांसें ले रहा है (हाफ रहा है), तो समझ जाएं कि उसके फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचने में दिक्कत हो रही है।
3. दिल की धड़कन का बेकाबू होना- इस स्थिति में दिल बहुत तेजी से धड़कने लगता है (Palpitations)। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ब्लड प्रेशर कम होने की वजह से दिल अंगों तक खून पहुंचाने के लिए जरूरत से ज्यादा जोर लगा रहा होता है।
4. मानसिक संतुलन बिगड़ना या बेहोशी- ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीज का दिमाग ठीक से काम नहीं करता। वह बहकी-बहकी बातें कर सकता है, अपनों को पहचानने में गलती कर सकता है, बहुत ज्यादा सुस्त हो सकता है या बेहोश भी हो सकता है।
5. त्वचा का रंग बदलना और ठंडी पड़ना- मरीज का पूरा शरीर, खासकर हाथ-पैर एकदम ठंडे और चिपचिपे महसूस होने लगते हैं। खून का दौरा ठीक से न होने के कारण त्वचा का रंग पीला, नीला या उस पर अजीब से चकत्ते (spots) दिख सकते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
9 Jul 2026, 3:10 PM IST
Published on:
9 Jul 2026, 3:10 PM IST
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