
PRP Therapy: अगर आपने सोशल मीडिया या इंटरनेट पर PRP इंजेक्शन या P-Shot (Priapus Shot) के बारे में पढ़ा है, तो आपने ऐसे दावे भी जरूर देखे होंगे कि इससे पुरुषों की यौन क्षमता बढ़ती है, इरेक्शन बेहतर होता है और यौन प्रदर्शन में सुधार आता है। ऐसे विज्ञापन देखकर कई लोग यह सोचने लगते हैं कि क्या यह वास्तव में प्रभावी इलाज है या सिर्फ प्रचार?
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH), Johns Hopkins Medicine और Cleveland Clinic के अनुसार, PRP थेरेपी का इस्तेमाल कई मेडिकल स्थितियों में किया जा रहा है, लेकिन पुरुषों की यौन स्वास्थ्य समस्याओं, खासकर इरेक्टाइल डिसफंक्शन (Erectile Dysfunction) के इलाज में इसके फायदे को लेकर अभी और मजबूत वैज्ञानिक शोध की जरूरत है।
PRP का पूरा नाम Platelet-Rich Plasma (प्लेटलेट-समृद्ध प्लाज्मा) है। इस प्रक्रिया में मरीज का थोड़ा-सा खून लिया जाता है। फिर मशीन की मदद से उसमें मौजूद प्लेटलेट्स को अलग कर एक गाढ़ा प्लाज्मा तैयार किया जाता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार उसी व्यक्ति के शरीर के प्रभावित हिस्से में यह प्लाज्मा इंजेक्ट किया जाता है। Johns Hopkins Medicine के अनुसार, प्लेटलेट्स में ऐसे ग्रोथ फैक्टर्स होते हैं जो ऊतकों की मरम्मत और उपचार प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं।
P-Shot यानी Priapus Shot में PRP को पुरुष जननांग के कुछ हिस्सों में इंजेक्ट किया जाता है। इसका उद्देश्य इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसी समस्याओं में सुधार लाने की कोशिश करना होता है। हालांकि यह हर मरीज के लिए मानक (स्टैंडर्ड) इलाज नहीं माना जाता।
NIH में प्रकाशित एक समीक्षा के अनुसार, शुरुआती कुछ अध्ययनों में PRP थेरेपी से इरेक्टाइल डिसफंक्शन वाले कुछ मरीजों में सुधार के संकेत मिले हैं। लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि अब तक उपलब्ध अध्ययन संख्या में सीमित हैं और उनमें शामिल मरीजों की संख्या भी कम है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि PRP हर मरीज के लिए प्रभावी और प्रमाणित इलाज है।
Cleveland Clinic के अनुसार, PRP कई क्षेत्रों में इस्तेमाल की जा रही एक उभरती हुई तकनीक है, लेकिन हर बीमारी के लिए इसके फायदे पूरी तरह साबित नहीं हुए हैं। इसी तरह Johns Hopkins Medicine भी बताता है कि PRP थेरेपी पर लगातार रिसर्च चल रही है और इसके परिणाम अलग-अलग स्थितियों में अलग हो सकते हैं।
PRP का उपयोग केवल यौन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल खेल से जुड़ी चोटों में, टेंडन और लिगामेंट की चोट और घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस के कुछ मामलों में साथ ही कुछ त्वचा और बालों से जुड़े उपचारों में भी किया जाता है। हालांकि हर उपयोग के लिए वैज्ञानिक प्रमाण समान स्तर के नहीं हैं।
क्योंकि इसमें मरीज का अपना ही खून इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए एलर्जी या अस्वीकृति (Rejection) का खतरा अपेक्षाकृत कम माना जाता है। फिर भी किसी भी इंजेक्शन की तरह इसमें कुछ जोखिम हो सकते हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, सूजन, हल्का संक्रमण, अस्थायी असहजता शामिल है। इसलिए यह प्रक्रिया हमेशा प्रशिक्षित और योग्य डॉक्टर की देखरेख में ही करानी चाहिए।
यदि आपको लंबे समय से इरेक्टाइल डिसफंक्शन है। मधुमेह, हृदय रोग या हार्मोन संबंधी समस्या है। खून पतला करने वाली दवाएं चल रही हैं और रक्त संबंधी कोई बीमारी है। तो किसी भी प्रकार की PRP थेरेपी कराने से पहले विशेषज्ञ यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।
फिलहाल PRP को इरेक्टाइल डिसफंक्शन का नियमित या पहली पसंद का इलाज नहीं माना जाता। इसके संभावित लाभों को बेहतर तरीके से समझने के लिए बड़े और उच्च गुणवत्ता वाले क्लिनिकल ट्रायल अभी भी जारी हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।