स्वास्थ्य

Psychologist and Psychiatrist: मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक में क्या है फर्क? मानसिक इलाज के लिए जानें किसे और कब दिखाएं

Psychologist and Psychiatrist Me Antar: मानसिक इलाज से पहले जानें साइकोलॉजिस्ट और साइकियाट्रिस्ट में क्या फर्क होता है। जानिए एनएचएस और साइकोलॉजी आर्गेनाईजेशन के अनुसार आपको कब और किसे दिखाना चाहिए।
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Jul 03, 2026
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साइकोथेरेपिस्ट भी बातचीत और थेरेपी के जरिए लोगों की मानसिक और भावनात्मक दिक्कतों को दूर करने में मदद करते हैं।- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- freepik)

Psychologist and Psychiatrist Difference : आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव, एंग्जायटी या डिप्रेशन होना बहुत आम बात हो गई है। लोग इसके इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाना तो चाहते हैं, लेकिन सबसे बड़ी उलझन यह होती है कि आखिर जाएं किसके पास? बहुत से लोग साइकोलॉजिस्ट (मनोवैज्ञानिक) और साइकियाट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) को एक ही समझ लेते हैं। लेकिन इन दोनों की पढ़ाई, इलाज करने का तरीका और काम बिल्कुल अलग होता है। आइए समझते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है और आपको कब किसके पास जाना चाहिए।

साइकियाट्रिस्ट (मनोचिकित्सक): जो दवाइयां देते हैं

एनएचएस के अनुसार, मनोचिकित्सक असल में एक क्वालिफाइड डॉक्टर होते हैं। इन्होंने पहले मेडिकल की पढ़ाई (जैसे MBBS) की होती है और फिर मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) में स्पेशलाइजेशन किया होता है। साइकोलॉजी आर्गेनाईजेशन के अनुसार, साइकियाट्रिस्ट बनने में 12 साल का समय लगता है। ये मरीज की मानसिक स्थिति को एक शारीरिक या बायोलॉजिकल बीमारी की तरह देखते हैं।

ये डॉक्टर होते हैं, इसलिए इन्हें मरीज को दवाइयां (जैसे एंटी-डिप्रेसेंट या नींद की दवाइयां) लिखने का पूरा कानूनी अधिकार होता है। अगर किसी को बहुत गंभीर मानसिक समस्या है, जैसे खुद को नुकसान पहुंचाने के ख्याल आना, बहुत ज्यादा मतिभ्रम (हैलुसिनेशन) होना, या ऐसी स्थिति जिसे बिना दवाइयों के ठीक नहीं किया जा सकता, तो मनोचिकित्सक के पास जाना चाहिए।

साइकोलॉजिस्ट (मनोवैज्ञानिक): जो बातों और थेरेपी काम में लेते हैं

मनोवैज्ञानिक कोई मेडिकल डॉक्टर नहीं होते, यानी इन्होंने MBBS जैसी पढ़ाई नहीं की होती। ये मनोविज्ञान (Psychology) में यूनिवर्सिटी की डिग्री या डॉक्टरेट (जैसे PhD) करते हैं। साइकोलॉजी आर्गेनाईजेशन के अनुसार, इनकी पढ़ाई 8 से 10 सालों में पूरी होती है। ये मरीज के व्यवहार, सोचने के तरीके और उनकी भावनाओं को गहराई से समझते हैं। ये इलाज के लिए किसी भी तरह की दवाई नहीं दे सकते।

इनका पूरा फोकस टॉक थेरेपी (Talk Therapy) या काउंसिलिंग पर होता है, जहां ये मरीज से बात करके उसकी उलझनों को सुलझाते हैं।अगर आप रिलेशनशिप की समस्याओं, नौकरी के तनाव, किसी अपने को खोने के दुख, या हल्के डिप्रेशन और एंग्जायटी से जूझ रहे हैं, जहां आपको अपनी सोच बदलने और मन हल्का करने की जरूरत है, तो मनोवैज्ञानिक सबसे सही विकल्प हैं।

साइकोथेरेपिस्ट (मनोचिकित्सक/थेरेपिस्ट) से यह कैसे अलग है?

इन्हीं से मिलता-जुलता एक और शब्द है साइकोथेरेपिस्ट। ये भी बातचीत और अलग-अलग तरह की थेरेपी के जरिए लोगों की मानसिक और भावनात्मक दिक्कतों को दूर करने में मदद करते हैं। ये मरीज को उनकी पुरानी आदतों या सोचने के गलत तरीकों को बदलने का रास्ता दिखाते हैं।

आपको किसके पास जाना चाहिए?

अगर आप तय नहीं कर पा रहे हैं, तो शुरुआत किसी मनोवैज्ञानिक (साइकोलॉजिस्ट) या अपने रेगुलर डॉक्टर से बात करके कर सकते हैं। वे आपकी स्थिति को देखकर आपको सही सलाह दे देंगे कि आपको सिर्फ काउंसिलिंग की जरूरत है या फिर किसी मनोचिकित्सक से दवाइयां लेने की भी आवश्यकता है। कई बार बेहतर रिकवरी के लिए मरीज को थेरेपी और दवाई दोनों की जरूरत साथ में पड़ती है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Updated on:
02 Jul 2026 06:47 pm
Published on:
03 Jul 2026 09:00 am