स्वास्थ्य

Rabies Infection: रेबीज से बागपत के युवक की मौत, क्लीवलैंड क्लिनिक और जॉन हॉपकिंस मेडिसिन से जानें जानवर के काटने के तुरंत बाद क्या करें?

Rabies Infection Cause: बागपत में कुत्ते के काटने के बाद रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाने से युवक की मौत हो गई। क्लीवलैंड क्लिनिक और जॉन हॉपकिंस मेडिसिन से जानें जानवरों के काटने से होने वाले रेबीज के लक्षण, यह शरीर पर कैसे असर करता है और सही समय पर बचाव के उपाय।
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Aug 20, 2026
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बागपत में कुत्ते के काटने से युवक की मौत - प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Shutterstock)

Rabies Infection Symptoms: इंसान की एक छोटी सी अनदेखी कभी-कभी उसकी जिंदगी पर इतनी भारी पड़ सकती है, जिसकी कल्पना भी कोई नहीं कर सकता। हाल ही में उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक खबर सामने आई है। यहां के ललियाना गांव में रहने वाले 35 साल के अनीश की रेबीज की वजह से मौत हो गई। सोशल मीडिया और खबरों में इसका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें अनीश के हाथ-पैर रस्सियों से बंधे हुए नजर आ रहे हैं और लोग उसे संभालने की कोशिश कर रहे हैं। पहली नजर में देखकर भले लगे कि किसी के साथ जबरदस्ती की जा रही है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह थी कि रेबीज का असर दिमाग तक पहुंचने के बाद अनीश का खुद पर कोई काबू नहीं रहा था और घरवाले उसे बचाकर अस्पताल पहुंचाने के लिए ऐसा करने पर मजबूर थे। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और जानवर के काटने के बाद क्या करना चाहिए।

यूपी के बागपत में क्या हुआ था पूरा मामला?

बागपत के ललियाना गांव में रहने वाले अनीश को करीब तीन महीने पहले एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। शुरुआत में घाव मामूली लगा, तो अनीश और उसके परिवार ने इसे हल्के में ले लिया और एंटी-रेबीज का टीका (Rabies Vaccine) नहीं लगवाया। उन्हें लगा कि सब ठीक है। लेकिन लगभग तीन महीने बीतने के बाद अचानक अनीश को तेज बुखार आया और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। जब परिजन इलाज के लिए ले गए, तो डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि अनीश को रेबीज हो चुका है।

जानवरों के काटने से कौन सी बीमारी होती है और रेबीज क्या है?

कुत्ते, बिल्ली, बंदर, चमगादड़ या गीदड़ जैसे जानवरों के काटने, खरोंचने या उनके लार के खुले घाव पर लगने से रेबीज (Rabies) नाम का खतरनाक वायरस इंसान के शरीर में फैल जाता है। रेबीज एक न्यूरोट्रोपिक वायरस है, जिसका सीधा मतलब यह है कि यह शरीर में प्रवेश करने के बाद नसों के रास्ते सीधे दिमाग और रीढ़ की हड्डी (Central Nervous System) पर हमला करता है।

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, रेबीज की सबसे खतरनाक बात यह है कि जब तक इसके लक्षण शरीर में दिखाई नहीं देते, तब तक इंसान बिल्कुल सामान्य लगता है। लेकिन एक बार अगर रेबीज के लक्षण (जैसे पानी से डरना, हवा से डरना, पागलपन जैसा व्यवहार) शुरू हो गए, तो दुनिया में इसका कोई इलाज नहीं बचता। इसके लक्षणों में दौरे पड़ना, मतिभ्रम और लकवा शामिल हैं।

रेबीज और इंफेक्शन के शुरुआती और गंभीर लक्षण

जानवर के काटने के बाद वायरस शरीर में धीरे-धीरे बढ़ता है। इसके लक्षण कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों बाद सामने आ सकते हैं;

  • काटे गए स्थान पर बहुत तेज खुजली, चींटियां काटने जैसा अहसास।
  • हल्का या तेज बुखार, सिरदर्द और थकावट होना।
  • हाइड्रोफोबिया (Hydrophobia)।
  • एयरोफोबिया (Aerophobia)।
  • तेज गुस्सा आना, किसी पर भी हमला करना, जोर-जोर से चिल्लाना, बहुत ज्यादा लार टपकना और भ्रम की स्थिति बनना।

जानवर काट ले तो तुरंत क्या करें?

जॉन हॉपकिंस मेडिसिन के अनुसार, किसी भी जानवर के काटने या खरोंचने को कभी छोटा न समझें। अगर कोई जानवर काट ले तो बिना देर किए ये कदम उठाएं:

  • घाव को तुरंत धोएं।
  • एंटीसेप्टिक लगाएं।
  • घाव को बांधे नहीं।
  • घरेलू नुस्खों से बचें।
  • तुरंत एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) लगवाएंरें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Updated on:
20 Aug 2026 12:22 pm
Published on:
20 Aug 2026 12:15 pm