
Russia Cancer Vaccine : रूस ने हाल ही में एक क्रांतिकारी चिकित्सा उपलब्धि हासिल की है। इसमें बताया जा रहा है कि रूस ने Enteromix नामक एक विशेष कैंसर वैक्सीन विकसित की है, जो कोलोरेक्टल कैंसर के इलाज के लिए तैयार की गई है। यह वैक्सीन National Medical Research Radiological Center (NMRRC) और Engelhardt Institute of Molecular Biology के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई थी। खास बात यह है कि इस वैक्सीन का निर्माण 134 साल पुराने ऐतिहासिक लैब में हुआ है, जो रूस की चिकित्सा अनुसंधान में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
Enteromix वैक्सीन एक व्यक्तिगत mRNA आधारित चिकित्सा समाधान है। यह वैक्सीन विशेष रूप से मरीज के ट्यूमर के आनुवंशिक प्रोफाइल के आधार पर तैयार की जाती है। इसका उद्देश्य प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने में प्रशिक्षित करना है। प्रारंभिक क्लीनिकल परीक्षणों में यह वैक्सीन पूरी तरह प्रभावशील और सुरक्षित पाई गई है। मरीजों को ट्यूमर में महत्वपूर्ण कमी देखने को मिली और कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं पाया गया।
इस विशेष शोध में महत्वपूर्ण योगदान एन.एफ. गामालेया राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र (N. F. Gamaleya National Research Center) की साइंस लाइब्रेरी का भी रहा है। यह लाइब्रेरी चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एक प्राचीन केंद्र है, जिसकी स्थापना 1891 में हुई थी। यहां लगभग 300,000 वैज्ञानिक प्रकाशन, शोधपत्र, थेसिस और लेख संग्रहित हैं। लाइब्रेरी में अद्यतन विषय और वर्णानुक्रमित कैटलॉग, वैज्ञानिक क्षेत्रवार थीमैटिक कैटलॉग, रूसी और विदेशी पत्रिकाओं के संदर्भ लॉग, शोधपत्र, और अन्य विधागत सामग्री उपलब्ध हैं।
वहां की सदस्यता प्रणाली में 19 घरेलू वैज्ञानिक और चिकित्सा जर्नल्स शामिल हैं, जैसे एंटीबायोटिक्स, प्रायोगिक जीव विज्ञान और चिकित्सा के बुलेटिन, वायरोलॉजी, जेनेटिक्स, इम्यूनोलॉजी, क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी, आणविक जेनेटिक्स, महामारी विज्ञान और संक्रामक रोगों के प्रश्न। यह संसाधन वैज्ञानिकों को शोध के लिए अत्यधिक सहायक साबित हो रहा है और आधुनिक शोध कार्यों को गति प्रदान कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Enteromix वैक्सीन एक क्रांतिकारी उपलब्धि साबित हो सकती है। यदि यह सफलतापूर्वक सभी परीक्षणों में खरा उतरती है, तो यह वैक्सीन पूरी दुनिया में कैंसर रोगियों के लिए आशा की किरण बनेगी। इस वैक्सीन से न केवल मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि चिकित्सा विज्ञान में नए मानक स्थापित होंगे।