
जीभ का आकार बड़ा किस कारण से होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Enlarged Tongue Symptoms: क्या आपने कभी किसी को देखा है जिसकी जीभ सामान्य से काफी बड़ी लगती है और मुंह में पूरी नहीं समाती? या फिर कभी-कभी खाना खाते, बात करते या सांस लेते वक्त जीभ इतनी भारी और मोटी महसूस होती है कि बहुत परेशानी होने लगती है? इसे जीभ की सूजन या मैक्रोग्लोसिया (Macroglossia) कहते हैं। यह कोई मामूली बात नहीं है। जब जीभ का साइज मुंह की जगह से बहुत ज्यादा बड़ा हो जाता है, तो इससे न सिर्फ बोलने और खाने-पीने में दिक्कत आती है, बल्कि कई बार रात को सोते समय सांस लेने में भी तकलीफ होने लगती है। आइए जानते हैं कि मैक्रोग्लोसिया क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और ऐसा क्यों होता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, मैक्रोग्लोसिया का मतलब है जीभ का सामान्य से बहुत ज्यादा बड़ा, मोटा या चौड़ा हो जाना। जब जीभ जरूरत से ज्यादा बड़ी हो जाती है, तो वह मुंह के अंदर का ज्यादातर हिस्सा घेर लेती है। यह समस्या कुछ बच्चों में जन्म से ही देखने को मिलती है, तो कुछ लोगों में उम्र बढ़ने के साथ-साथ किसी अंदरूनी बीमारी, इन्फेक्शन या शरीर में हार्मोन की गड़बड़ी की वजह से होने लगती है।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, जीभ का साइज अपने आप ऐसे ही नहीं बढ़ता, इसके पीछे कई बीमारियां और शरीर की अंदरूनी दिक्कतें जिम्मेदार होती हैं;
यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के अंदर 'एमाइलॉयड' नाम का एक खराब प्रोटीन बनने लगता है और अंगों में जमा होने लगता है। जब यह प्रोटीन जीभ की मांसपेशियों में जमा होता है, तो जीभ धीरे-धीरे सख्त और मोटी होती चली जाती है। जीभ का अचानक बड़ा होना इस बीमारी का एक मुख्य संकेत माना जाता है।
कई बार बच्चे पैदा होते ही बड़ी जीभ के साथ जन्म लेते हैं। इसके पीछे ये मुख्य वजहें हो सकती हैं;
मुंह में किसी इन्फेक्शन, एलर्जी या अचानक कोई चोट लग जाने के कारण भी जीभ में तेज सूजन आ सकती है। हालांकि, इन्फेक्शन या चोट ठीक होते ही जीभ का साइज वापस नॉर्मल हो जाता है।
जीभ बड़ी होने का इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या किस वजह से शुरू हुई है, अगर जीभ थायराइड, हार्मोनल गड़बड़ी या एमाइलॉयडोसिस की वजह से बढ़ी है, तो डॉक्टर सबसे पहले उस बीमारी की दवाएं शुरू करते हैं। अगर बोलने में दिक्कत आ रही हो, तो स्पीच थेरेपिस्ट की मदद से जीभ की कसरत और सही से बोलने की प्रैक्टिस कराई जाती है। अगर जीभ के दबाव से दांत बाहर निकल आए हैं, तो तार (ब्रेसिज) लगाकर दांतों को सही जगह पर लाया जाता है। जब जीभ इतनी ज्यादा बड़ी हो जाए कि सांस लेना मुश्किल हो जाए या खाना खाना बिल्कुल बंद हो जाए, तो डॉक्टर छोटी सी सर्जरी करके जीभ के एक्स्ट्रा हिस्से को काटकर उसे सही शेप दे देते हैं।
अगर आपको या आपके परिवार में किसी को जीभ की वजह से खाने, बोलने या सांस लेने में लगातार दिक्कत हो रही है, या जीभ मुंह के अंदर पूरी तरह नहीं आ पा रही है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। किसी अच्छे डॉक्टर या कान-नाक-गले के विशेषज्ञ (ENT Specialist) से तुरंत जांच करवाएं ताकि सही समय पर इसकी वजह पता चल सके और इलाज शुरू हो सके।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
02 Sept 2026 08:56 am
Published on:
02 Sept 2026 08:55 am
