Endometriosis Symptoms: अगर पीरियड के समय बहुत ज्यादा दर्द, उल्टी या थकान होती है तो इसे सामान्य न समझें। यह एंडोमेट्रियोसिस का संकेत हो सकता है। जानिए इसके लक्षण, कारण और इलाज।
Endometriosis Symptoms: अक्सर लड़कियों और महिलाओं को होने वाला तेज पीरियड दर्द सामान्य मान लिया जाता है। खासकर किशोरावस्था में लोगों को लगता है कि पीरियड के समय दर्द होना एक आम बात है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि अगर दर्द बहुत ज्यादा हो और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह एंडोमेट्रियोसिस नाम की बीमारी का संकेत हो सकता है।
एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय (यूटेरस) की अंदरूनी परत जैसी कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगती हैं। यह ऊतक अक्सर अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, पेल्विस की परत, ब्लैडर या आंतों के आसपास भी विकसित हो सकता है। पीरियड्स के दौरान हार्मोनल बदलाव की वजह से यह ऊतक भी प्रतिक्रिया करता है, जिससे सूजन, दर्द और कभी-कभी निशान (स्कार टिश्यू) बनने लगते हैं।
अक्सर लोग मानते हैं कि यह बीमारी सिर्फ बड़ी उम्र की महिलाओं में होती है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक एंडोमेट्रियोसिस की शुरुआत किशोरावस्था में भी हो सकती है। कई बार यह पहली या शुरुआती कुछ पीरियड साइकिल से ही शुरू हो जाती है। क्योंकि इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए कई लड़कियों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उन्हें यह समस्या है।
एंडोमेट्रियोसिस का सबसे आम लक्षण तेज पीरियड दर्द है, लेकिन इसके अलावा भी कई संकेत हो सकते हैं, जैसे:
कई किशोरियां इन लक्षणों को सामान्य समझकर सहती रहती हैं, जिससे बीमारी का पता लगाने में काफी देर हो जाती है।
डॉक्टरों के मुताबिक अगर एंडोमेट्रियोसिस का समय पर इलाज न किया जाए, तो यह आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकती है। इससे लगातार पेल्विक दर्द, शरीर के अंदर चिपकाव (एडहेजन्स) और भविष्य में गर्भधारण में परेशानी हो सकती है। कई मामलों में महिलाओं को इस बीमारी का पता 20-30 साल की उम्र में चलता है, जबकि यह समस्या उन्हें कई साल पहले से होती है।
अगर पीरियड का दर्द इतना ज्यादा हो कि स्कूल या कॉलेज जाना मुश्किल हो जाए। सामान्य दर्द की दवाओं से भी राहत न मिले। बार-बार उल्टी या बेहोशी जैसा महसूस हो। रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें। तो तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड या अन्य जांच कर सकते हैं।
एंडोमेट्रियोसिस का इलाज उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। हल्के मामलों में दवाइयों, हार्मोनल थेरेपी और लाइफस्टाइल बदलाव से राहत मिल सकती है। अगर समस्या ज्यादा गंभीर हो, तो लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए अतिरिक्त टिश्यू को हटाया जा सकता है।सबसे जरूरी बात यह है कि तेज पीरियड दर्द को सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और इलाज से इस बीमारी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है और भविष्य की जटिलताओं से बचा जा सकता है।