Shingles Symptoms: क्या आपको पता है कि बचपन का चिकनपॉक्स वायरस सालों बाद शिंगल्स बन सकता है? जानिए इसके कारण, लक्षण, फैलने का तरीका, इलाज और वैक्सीन से बचाव के आसान उपाय।
Shingles Symptoms: शिंगल्स एक बहुत दर्दनाक बीमारी है, जो ज्यादातर बड़ों में होती है और उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा भी बढ़ जाता है। खासकर 50 साल के बाद या जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उनमें यह ज्यादा देखने को मिलती है। US Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार, बढ़ती उम्र और कमजोर इम्यून सिस्टम शिंगल्स का सबसे बड़ा जोखिम कारक हैं।
शिंगल्स कोई नई बीमारी नहीं है, बल्कि यह उसी वायरस का दोबारा सक्रिय होना है जो चिकनपॉक्स (चेचक) का कारण बनता है। इस वायरस को वैरीसेला-जोस्टर वायरस कहा जाता है। अगर आपको कभी बचपन या जीवन में चिकनपॉक्स हुआ है, तो यह वायरस पूरी तरह खत्म नहीं होता। यह शरीर के नर्व टिश्यू यानी नसों के पास, खासकर दिमाग और रीढ़ की हड्डी के आसपास, सालों तक छिपा रहता है। इसे डॉर्मेंट यानी निष्क्रिय अवस्था कहा जाता है।
लेकिन जब शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती है, जैसे बढ़ती उम्र, डायबिटीज, किडनी रोग या किसी अन्य बीमारी की वजह से तब यही वायरस फिर से एक्टिव होकर शिंगल्स बन जाता है।
शिंगल्स खांसी या छींक से नहीं फैलता। लेकिन अगर किसी व्यक्ति के फफोलों के तरल पदार्थ को सीधे छू लिया जाए, तो यह उस व्यक्ति को चिकनपॉक्स दे सकता है जिसे पहले कभी चिकनपॉक्स नहीं हुआ या वैक्सीन नहीं लगी। इसलिए संक्रमण के दौरान साफ-सफाई रखना, दाने ढककर रखना और गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों से दूरी रखना जरूरी होता है। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर इलाज बहुत जरूरी है।
शिंगल्स का कोई पूरी तरह स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन एंटीवायरल दवाएं बीमारी की अवधि कम कर देती हैं और दर्द व जटिलताओं को घटाती हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि दाने निकलने के 72 घंटे के भीतर इलाज शुरू कर देना चाहिए। आमतौर पर शिंगल्स 7 से 10 दिन में ठीक होने लगता है। पहले लाल दाने बनते हैं, फिर फफोले और बाद में पपड़ी बनकर सूख जाते हैं।
शिंगल्स से बचाव का सबसे अच्छा तरीका वैक्सीन है। शिंग्रिक्स नाम की वैक्सीन को काफी प्रभावी माना जाता है और यह करीब 90% तक सुरक्षा देती है। यह वैक्सीन 2 डोज में लगती है और कम से कम 10 साल तक सुरक्षा दे सकती है। GlaxoSmithKline द्वारा बनाई गई यह वैक्सीन भारत में भी उपलब्ध है।