Silent Mental Health Crisis Hindi : एम्स, नई दिल्ली की शोध रिपोर्ट के अनुसार, गांवों में रहने वाले बच्चे और किशोर डिप्रेशन और एंग्जायटी का शिकार हो रहे हैं। मनोचिकित्सक से समझें बच्चों के मेंटल हेल्थ खराब होने के शुरूआती लक्षण।
Silent Mental Health: गांवों में रहने वाले बच्चे और किशोर अक्सर मानसिक तनाव के शिकार होते हैं। लेकिन हम लोग इसे सामान्य मानकर छोड़ देते हैं। अब एम्स, नई दिल्ली (AIIMS) की एक रिसर्च ने बड़ी चिंता सामने रखी है। शोध रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों का हर 6 में से 1 बच्चा (Teenage) मानसिक तनाव से गुजर रहा है। यही तनाव आगे चलकर एंग्जायटी, डिप्रेशन और व्यवहार से जुड़ी बड़ी परेशानियां बन सकता है।
आइए, डॉक्टर आदित्य सोनी ( MD, Psychiatrist) से जानते हैं इसके शुरुआती लक्षण क्या होते हैं और बच्चों को मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए क्या करना चाहिए।
इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन में छपी एक रिपोर्ट जो हरियाणा के 28 गांवों के 583 किशोरों से बातचीत पर आधारित है। यह स्टडी साफ दिखाती है कि गांवों में रहने वाले बच्चे किस तरह चुपचाप मानसिक परेशानी और तनाव को झेल रहे हैं।
डॉक्टर आदित्य सोनी के अनुसार, बच्चे में ये बदलाव लंबे समय तक दिखें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर बच्चा पहले की तुलना में ज्यादा चिड़चिड़ा, गुस्सैल या शांत रहने लगे तो यह मानसिक तनाव का संकेत हो सकता है। अचानक स्कूल जाने से बचना, पढ़ाई में मन न लगना या प्रदर्शन गिरना, बहुत ज्यादा सोना, कम सोना, भूख कम लगना या जरूरत से ज्यादा खाना भी मानसिक परेशानी का संकेत हो सकता है।
अगर बच्चा परिवार और दोस्तों से दूरी बनाने लगे, बातचीत कम कर दे या खुद में रहने लगे तो इस पर ध्यान देना जरूरी है। बार-बार रोना, बेवजह डर लगना, आत्मविश्वास कम होना या निराशा महसूस करना भी चेतावनी हो सकती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।