स्वास्थ्य

आपको भी आते हैं तेज खर्राटे! शरीर के इन 3 अंगों को चुपचाप डैमेज कर रही है यह बीमारी, रिसर्च में हुआ खुलासा

Sleep Apnea Cause: क्या आप भी खर्राटों को गहरी नींद की निशानी समझते हैं? नई रिसर्च बताती है कि यह स्लीप एपेनिया नाम की बीमारी हो सकती है। इसमें सोते समय आपकी सांस बार-बार रुकती है, जिससे शरीर के अंगों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। यह लापरवाही आपके दिल, दिमाग और लिवर को बीमार कर सकती है।

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Apr 24, 2026
sleep apnea Cause (Image- gemini)

Sleep Apnea Cause: अक्सर घर के बुजुर्ग कहते हैं कि खर्राटे लेना गहरी नींद की पहचान है, लेकिन विज्ञान इससे बिल्कुल उलट बात कह रहा है। हालही में हुई अमेरिकी एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन (American Academy of Sleep Medicine) की एक रिसर्च में सामने आया है कि जब कोई व्यक्ति सोते समय तेज खर्राटे लेता है या उसकी सांस बीच-बीच में अटकती है, तो उसका शरीर अंदर ही अंदर एक बड़ी जंग लड़ रहा होता है। ऑक्सीजन की कमी के कारण शरीर के मुख्य हिस्से जैसे दिल और दिमाग धीरे-धीरे डैमेज होने लगते हैं। आइए जानते हैं कि रिसर्च किन 5 बिमारियों के प्रति हमें आगाह कर रही है।

किन 5 बिमारियों का खतरा बढ़ता है?

  • हार्ट अटैक और स्ट्रोक।
  • टाइप-2 डायबिटीज।
  • दिमाग की कमजोरी।
  • लिवर में सूजन।
  • मोटापा

खर्राटे लेना कितना खतरनाक होता है?

सोते समय जब ऑक्सीजन का लेवल गिरता है, तो शरीर का सुरक्षा तंत्र घबरा जाता है और तनाव वाले हार्मोन रिलीज करता है। इससे न केवल रात की नींद खराब होती है, बल्कि अगले पूरे दिन थकान, चिड़चिड़ापन और काम में मन न लगने जैसी समस्याएं बनी रहती हैं।

स्लीप एपेनिया क्या है?

जब आप सोते हैं, तो आपके गले की मांसपेशियां बहुत ज्यादा रिलैक्स (ढीली) हो जाती हैं। इस वजह से सांस लेने वाली नली संकरी हो जाती है या पूरी तरह बंद हो जाती है। जब हवा अंदर नहीं जा पाती, तो शरीर में ऑक्सीजन का लेवल गिर जाता है और कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ जाती है।जैसे ही ऑक्सीजन कम होती है, आपका दिमाग घबराकर आपको एक झटके के साथ जगा देता है ताकि आप फिर से सांस ले सकें।

स्लीप एपेनिया से कैसे बचाएं खुद को?

  • वजन पर काबू।
  • सोने का तरीका बदलें।
  • नशे से दूरी बनाएं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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