स्वास्थ्य

Stroke Symptoms: स्ट्रोक आने से पहले शरीर देता है ये संकेत, मेयो क्लिनिक और NINDS से जानें पहचानने का FAST फॉर्मूला

Stroke Symptoms Hindi: क्या आप जानते हैं कि स्ट्रोक (लकवा) आने से पहले हमारा शरीर क्या इशारे देता है? जानिए मेयो क्लिनिक का वह 1 मिनट का FAST फॉर्मूला जो किसी की जान बचा सकता है।
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Updated: 18 Jul 2026, 1:34 PM IST
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स्ट्रोक आने पर हर एक सेकंड बहुत कीमती होता है।- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Stroke Prevention: जैसे दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ता है, ठीक वैसे ही हमारे दिमाग को भी दौरा पड़ता है, जिसे डॉक्टर स्ट्रोक (Stroke) कहते हैं। जब दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नसें बंद हो जाती हैं या फट जाती हैं, तो दिमाग के हिस्से काम करना बंद कर देते हैं। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर एंड स्ट्रोक के अनुसार, स्ट्रोक से पीड़ित व्यक्ति को शायद पता ही न चले कि उसे स्ट्रोक हो रहा है। आइए मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) से जानते हैं वो फॉर्मूला तरीका जिससे आप स्ट्रोक की पहचान कर सकते हैं।

हमेशा याद रखें FAST फॉर्मूला

1. F - Face (चेहरा)- मरीज को मुस्कुराने के लिए कहें। देखें कि क्या उनका चेहरा या मुंह एक तरफ से लटक रहा है या टेढ़ा हो रहा है?

2. A - Arms (हाथ)- मरीज से कहें कि वे अपने दोनों हाथ ऊपर उठाएं। क्या एक हाथ ऊपर उठने के बजाय नीचे गिर रहा है या उसमें कमजोरी महसूस हो रही है?

3. S - Speech (बोलना)- मरीज से कोई भी एक आसान सी लाइन बोलने को कहें (जैसे- "आज मौसम अच्छा है")। देखें कि क्या उनकी आवाज लड़खड़ा रही है, या वे अजीब तरह से बोल रहे हैं जो समझ नहीं आ रहा?

4. T - Time (समय)- अगर आपको ऊपर दिए गए तीनों लक्षणों में से एक भी लक्षण दिखाई देता है, तो बिना एक सेकंड गंवाए तुरंत एम्बुलेंस को फोन करें। समय ही सब कुछ है!

ये 3 छोटे संकेत भी हैं बड़े खतरे की घंटी

FAST के अलावा, शरीर कुछ और भी इशारे देता है जिन्हें लोग अक्सर मामूली समझकर छोड़ देते हैं;

  • अचानक शरीर का एक हिस्सा सुन्न होना।
  • आंखों के आगे अंधेरा छाना।
  • बिना वजह सिर में दर्द।

स्ट्रोक आने पर क्या बिल्कुल न करें?

कई बार लोग सोचते हैं कि थोड़ी देर आराम करने से ठीक हो जाएगा, लेकिन यह सबसे बड़ी भूल है। मरीज को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं। मरीज को अपनी मर्जी से कोई भी दवा (जैसे एस्पिरिन) या पानी पीने को न दें, क्योंकि स्ट्रोक में निगलने वाली मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे पानी फेफड़ों में जा सकता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
18 Jul 2026, 1:34 PM IST
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