Summer Health Tips Hindi: तेज गर्मी में काम करने वालों को है ज्यादा खतरा! जानिए हीट स्ट्रोक के लक्षण और 5 जरूरी टेस्ट जो आपकी सेहत को बचा सकते हैं।
Heat stroke symptoms: गर्मी का मौसम आते ही सबसे ज्यादा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। खासकर उन लोगों पर जो दिनभर बाहर या भारी काम करते हैं, जैसे फैक्ट्री वर्कर्स, मजदूर या कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने वाले लोग। तेज धूप और लू के कारण शरीर जल्दी थक जाता है और कई बार समस्या गंभीर भी हो सकती है।
Dr Mayanka Lodha Seth के अनुसार, गर्मी में शरीर को ठंडा रखना एक बड़ा चैलेंज बन जाता है। कई बार इसके शुरुआती संकेत हम नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में बड़ी परेशानी बन सकते हैं।
डॉक्टर के मुताबिक, गर्मी का असर धीरे-धीरे बढ़ता है। सबसे पहले शरीर में थर्मोरेगुलेटरी स्ट्रेस होता है, यानी शरीर अपना तापमान कंट्रोल नहीं कर पाता। इस दौरान ज्यादा पसीना निकलता है और शरीर में पानी व मिनरल्स की कमी होने लगती है। इसके शुरुआती लक्षण होते हैं:
अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह हालत “हीट एग्जॉशन” में बदल सकती है। इस स्टेज पर इंसान को बहुत ज्यादा थकान, मांसपेशियों में दर्द और ध्यान लगाने में दिक्कत होने लगती है। सबसे खतरनाक स्टेज होती है “हीट स्ट्रोक”, जिसमें शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और यह जानलेवा भी हो सकता है।
डॉ. मयंका लोढ़ा सेठ बताती हैं कि कई बार शरीर के अंदर की समस्या बाहर से नजर नहीं आती। इसलिए गर्मियों में कुछ जरूरी टेस्ट करवाना फायदेमंद हो सकता है।
ज्यादा पसीने से शरीर का बैलेंस बिगड़ जाता है। यह टेस्ट डिहाइड्रेशन और किडनी पर पड़ रहे असर को दिखाता है।
गर्मी और पानी की कमी से शुगर लेवल अचानक बढ़ सकता है, इसलिए इसे चेक करना जरूरी है।
अगर बार-बार थकान या कमजोरी महसूस हो रही है तो यह टेस्ट एनीमिया या इंफेक्शन का पता लगाता है।
गर्मी में खान-पान बदल जाता है, जिससे लिवर पर असर पड़ सकता है।
अगर शरीर में कमजोरी ज्यादा लग रही है तो यह पोषण की कमी का संकेत हो सकता है।
डॉक्टर का कहना है कि सिर्फ जानकारी होना काफी नहीं है, सही कदम उठाना भी जरूरी है:
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।