Summer Skin Care: गर्मियों में तेज धूप सिर्फ त्वचा ही नहीं, आंखों और स्कैल्प को भी नुकसान पहुंचाती है। जानिए सनस्क्रीन लगाने का सही तरीका और UV किरणों से बचाव के जरूरी टिप्स।
Sun Protection Tips: गर्मियों के मौसम में जब पारा 40 डिग्री के पार जाने लगता है, तो ज्यादातर लोग धूप से बचने के लिए चेहरे और हाथों पर सनस्क्रीन लगाकर घर से बाहर निकल जाते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें सिर्फ त्वचा को ही नहीं, बल्कि आंखों और सिर की त्वचा यानी स्कैल्प को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।
अक्सर लोग चेहरे की सुरक्षा में इतने व्यस्त रहते हैं कि शरीर के इन बेहद संवेदनशील हिस्सों को नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि गर्मियों में आंखों में जलन, डार्क सर्कल्स, स्कैल्प में खुजली और बाल झड़ने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। इस विषय पर एसएमएस अस्पताल,जयपुर के चर्म रोग विभाग के सह आचार्य डॉ. पुनीत अग्रवाल बताते हैं कि तेज धूप का असर सिर्फ चेहरे तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक धूप में रहने से स्कैल्प और आंखों के आसपास की त्वचा भी धीरे-धीरे डैमेज होने लगती है।
डॉ. पुनीत अग्रवाल के मुताबिक, जब सिर की त्वचा पर सीधे धूप पड़ती है, तो वहां की स्किन प्रभावित होने लगती है। खासकर बालों के बीच की खाली जगह या मांग (Parting Line) पर तेज यूवी किरणें सीधे असर करती हैं, जिससे स्कैल्प सनबर्न का शिकार हो सकती है।
इसके कारण कई परेशानियां शुरू हो सकती हैं, जैसे:
डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि आंखों के आसपास की त्वचा बेहद पतली और संवेदनशील होती है। तेज धूप की वजह से इस हिस्से में पिग्मेंटेशन और डार्क सर्कल्स गहरे हो सकते हैं। इसके अलावा धूप के कारण आंखों में सूखापन (Dry Eyes) जलन और भारीपन, आंखों की थकान साथ ही समय से पहले मोतियाबिंद (Cataract) का खतरा भी बढ़ सकता है।
अक्सर लोग सनस्क्रीन को साधारण क्रीम की तरह कभी भी लगा लेते हैं, जबकि सही सुरक्षा के लिए इसे सही तरीके से लगाना बेहद जरूरी है। डॉ. पुनीत अग्रवाल ने इसके लिए कुछ जरूरी नियम बताए हैं।
ऐसी सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें जो UVA और UVB दोनों तरह की किरणों से सुरक्षा दे। जयपुर और उत्तर भारत की तेज गर्मी के लिए SPF 30 या SPF 50 वाली सनस्क्रीन बेहतर मानी जाती है।
सनस्क्रीन को घर से निकलने के तुरंत पहले नहीं लगाना चाहिए। त्वचा में इसे असर करने में थोड़ा समय लगता है। इसलिए बाहर जाने से कम से कम 20-30 मिनट पहले इसे अच्छी तरह अप्लाई करें।
गर्मियों में पसीने की वजह से सनस्क्रीन जल्दी हट जाती है। अगर आप लंबे समय तक धूप में रहते हैं या फील्ड वर्क करते हैं, तो हर 2-3 घंटे बाद दोबारा सनस्क्रीन लगाना जरूरी है।
अक्सर लोग कान के पीछे, गर्दन, हाथ, स्कैल्प जैसे हिस्सों पर सनस्क्रीन लगाना भूल जाते हैं। जबकि धूप का असर इन हिस्सों पर भी उतना ही पड़ता है। आजकल स्कैल्प के लिए सनस्क्रीन स्प्रे और पाउडर भी उपलब्ध हैं, जिनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
धूप से आंखों को बचाने के लिए यूवी-प्रोटेक्टेड सनग्लासेस पहनना बेहद जरूरी है। इसके अलावा बाहर निकलते समय टोपी, हैट या छाते का इस्तेमाल भी फायदेमंद माना जाता है। गर्मियों में धूप से बचाव का मतलब सिर्फ चेहरे पर सनस्क्रीन लगाना नहीं है। आंखें, स्कैल्प और शरीर के बाकी खुले हिस्से भी बराबर सुरक्षा मांगते हैं। अगर समय रहते इनकी देखभाल न की जाए, तो धूप धीरे-धीरे त्वचा, बालों और आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।