Talking To Yourself: खुद से अकेले में बात करना कोई पागलपन या मानसिक विकार नहीं होता है, बल्कि यह अन्य लोगों की तुलना में आपकी मानसिक शक्ति ज्यादा होने का संकेत होता है। आइए जानते हैं कि इसके बारे में रिसर्च क्या कहती है और इसके क्या फायदे होते हैं?
Talking To Yourself: आपने कई लोगों को देखा होगा कि जब वे अकेले होते हैं, चाहे बैठे हों या फिर कहीं से आ रहे हों, वे खुद से बात करते रहते हैं। यानी जब कोई साथ नहीं होता तो वे खुद से बात करते हैं और यह दुनिया उनको मानसिक रूप से कमजोर समझती है या फिर कहा जाता है कि उनको कोई मानसिक विकार है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्या वास्तव में उनको कोई मानसिक समस्या है या फिर यह सामान्य है? अब जाहिर सी बात है कि यह सामान्य तो नहीं है, क्योंकि सामान्य होता तो ज्यादातर लोगों के साथ होता। लेकिन यह बहुत कम लोगों के साथ होता है, इसलिए यह कुछ अलग है।
अभी हाल ही में हुए बिशपस्ट्रो (Bishopstrow) और प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक एथन क्रॉस (Ethan Kross) के शोध के अनुसार अकेले में खुद से बात करना असल में 'मेंटल हाई गियर' होता है। यानी जो लोग अकेले में खुद से बात करते हैं, उनके लिए यह प्लस पॉइंट होता है कि वे अन्य लोगों की तुलना में थोड़े जीनियस होते हैं। आइए जानते हैं कि खुद से बात करना आपकी सेहत और दिमाग के बारे में क्या संकेत देता है?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार अकेले में खुद से बात करना 'सेल्फ-डायरेक्टेड स्पीच' कहलाता है। मिशिगन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एथन क्रॉस की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार जो लोग खुद से बात करते हैं, उनका दिमाग ऑटोपायलट मोड से बाहर निकल जाता है। ऐसे व्यक्ति ज्यादातर कोई बड़े वैज्ञानिक, बड़े सर्जन या बड़े स्तर के एलीट एथलीट्स होते हैं। कठिन हो या सामान्य, हर स्थिति में खुद को संभालना उनका फोकस बहुत ज्यादा बढ़ा देता है।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार अकेले में खुद से बात करना आपकी असाधारण बुद्धिमत्ता (Exceptional Intelligence) और मेटाकॉग्निशन की ओर संकेत करता है। उनका मानना है कि यह एक अलग और अद्भुत मानसिक क्षमता है, जिसका प्रयोग दुनिया के सबसे सफल व्यक्ति तब करते हैं जब वे खुद को दबाव में महसूस करते हैं।
1. तनाव कम रहता है।
2. याददाश्त बढ़ती है।
3. समस्या का समाधान खुद निकल आता है।
प्रोफेसर एथन क्रॉस के अनुसार खुद से बात करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि जब भी बात शुरू करें तो खुद का नाम लेकर करें। 'थर्ड पर्सन सेल्फ-टॉक' तरीके का प्रयोग करें। खुद का नाम लेने से आपके दिमाग में आपकी खुद की तस्वीर आएगी, इसी कारण तनाव कम करना आसान हो जाता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।