Tamal Roy Chowdhury Sleep Death : भारतीय सिनेमा के फेमस एक्टर तमल रॉय चौधरी का निधन हो चुका है। बताया जा रहा है कि 09 मार्च को 80 वर्षीय एक्टर की मौत सोते-सोते (Tamal Roy Chowdhury Death Reason) कोलकाता निवास पर हो गई। आइए, डॉ. गौरव सिंघल (कार्डियोलॉजिस्ट) से जानते हैं कि नींद में मौत कैसे होती है और इसके पीछे का कारण क्या है?
Tamal Roy Chowdhury Sleep Death : भारतीय सिनेमा के लिए ये दुखद खबर है। फेमस एक्टर तमल रॉय चौधरी का निधन (Tamal Roy Chowdhury Dies) हो चुका है। बताया जा रहा है कि 09 मार्च को 80 वर्षीय एक्टर की मौत सोते-सोते (Sleep Death) कोलकाता निवास पर हो गई। एक्टर तमल ने बॉलीवुड की एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ भी काम किया था और अधिकत बंगाली सिनेमा में काम किए। आइए, डॉ. गौरव सिंघल (कार्डियोलॉजिस्ट) से जानते हैं कि नींद में मौत कैसे होती है और इसके पीछे का कारण क्या है?
एक्टर तमल रॉय चौधरी का निधन नींद में हुआ है। पीटीआई को परिवार की ओर से ये जानकारी दी गई है। बताया जा रहा है कि कार्डियक अरेस्ट होने के कारण वो नींद में चल बसे। परिवार शोक में डूबा हुआ है। साथ ही फैंस भी सोशल मीडिया पर शोक प्रकट कर रहे हैं।
डॉ. सिघल ने बताया कि हमें अपने आसपास भी अक्सर ऐसी खबरें सुनते हैं- "वो सोए तो फिर उठे नहीं, वो सोते सोते ही दम तोड़ दिए…।" इस तरह की अधिकतर मौतों का कारण कार्डियक अरेस्ट माना जाता है। नींद में कार्डियक अरेस्ट आने के बाद व्यक्ति दम तोड़ देता है। वैसे भी आपने देखा होगा कि कुछ लोग चलते-फिरते, नाचते-नाचते, खेलते-कूदते, खाते-पीते या बैठे-बैठे ही एकाएक गिर जाते हैं और कुछ मिनटों में दम तोड़ देते हैं।
इन सबके पीछे कार्डियक अरेस्ट मुख्य कारण हो सकता है। हालांकि, लोग हार्ट अटैक कहते हैं। पर, दिल का दौरा पड़ने से अचानक मौत होने के चांसेज बेहद कम होते हैं। जबकि, कार्डिय अरेस्ट होने पर मरने के चांसेज बहुत अधिक होते हैं। इसके अलावा नीचे दिए ये दो कारण भी हो सकते हैं-
इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं। ये इतना अचानक होता है कि लक्षण पहचान करते-करते भी मौत हो सकती है। फिर भी अगर आपको सोने से पहले निम्नलिखित लक्षण दिखते हैं तो सावधान हो जाएं या डॉक्टर से संपर्क करें-
अगर कोई व्यक्ति सोया है और पंखा-एसी में भी पसीने से तर-बतर हो रखा है तो उस व्यक्ति को हल्के से नींद से उठाएं।
कार्डियक अरेस्ट अगर आपके सामने हुआ है तो आपको फटाक से सीपीआर देना शुरू करना चाहिए। आप सीपीआर देकर जान बचा सकते हैं। इसके साथ ही अस्पताल लेकर जाएं।