Tetanus Injection: क्या आपको भी लगता है कि जब भी लोहे से चोट लगे तब टिटनेस का इंजेक्शन (TT Injection) लगवाना चाहिए? अगर हां, तो आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। आइए डॉक्टर दीपा अग्रवाल (MD, एलर्जी स्पेशलिस्ट) से जानते हैं कि हर बार चोट लगने पर टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना क्यों गलत है? इसको कब लगवाना चाहिए? हमारे शरीर पर इसके क्या नुकसान हो सकते हैं।
Tetanus Injection: आपने कई बार देखा होगा कि जब हमें चोट लगती है और विशेषकर जब लोहे से चोट लगती है तो हमको सबसे पहले हमको यही सलाह दी जाती है कि टिटनेस का टीका लगवा लो। लेकिन, क्या ये सलाह सही है? क्योंकि, टिटनेस का टीका लगवाने से आपकी जान को खतरा हो सकता है। जी हां, हाल ही में डॉक्टर दीपा अग्रवाल (MD, एलर्जी स्पेशलिस्ट) ने एक वीडियो शेयर कर जानकारी दी है कि हर बार चोट लगने के बाद TT का इंजेक्शन आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
आइए, जानते हैं कि चोट लगने पर टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना क्यों गलत है? इसको कब लगवाना चाहिए? हमारे शरीर पर इसके क्या नुकसान हो सकते हैं।
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टिटनेस की वैक्सीन शरीर में लंबे समय तक असरदार रहती है। अगर आप हर महीने या हर छोटी चोट पर इसे लगवाते हैं, तो शरीर में हाइपर-इम्यूनाइजेशन की स्थिति बन सकती है। इसका मतलब है कि शरीर का इम्यून सिस्टम जरूरत से ज्यादा रिएक्ट करने लगता है, जिससे गंभीर एलर्जी या इम्यूनिटी पर असर पड़ सकता है।
अक्सर घर में या बाहर खेलत-कूदते वक्त जब हमें चोट लगती है, तो सबसे पहला सवाल यही होता है कि चोट लोहे से लगी है क्या? अगर जवाब ना हो, तो हम इंजेक्शन नहीं लगवाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि टिटनेस का बैक्टीरिया (Clostridium tetani) मिट्टी, खाद, धूल और जानवरों के मल में पाया जाता है। अगर आपको किसी पत्थर से चोट लगी है या गिरने की वजह से छिल गया है और उसमें मिट्टी लग गई है, तो भी टिटनेस का खतरा उतना ही है जितना लोहे से।
डॉक्टर्स और WHO के मुताबिक, टिटनेस के टीके का असर शरीर में लंबे समय तक रहता है। आपको हर बार इंजेक्शन की जरूरत नहीं है अगर पिछला इंजेक्शन 5 साल के भीतर लगा हो लेकिन चोट बहुत गहरी या गंदी नहीं है, तो 5 साल तक सुरक्षा बनी रहती है। अगर चोट साफ है और आपको 10 साल के भीतर टीका लगा है, तो भी बूस्टर की जरूरत नहीं होती।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।