स्वास्थ्य

Respiratory illness : मासूम दिखने वाले ये सफेद फूल आपकी सांसें छीन सकते हैं, जानिए कैसे

Parthenium plant Respiratory issue : आपने शायद इसे देखा भी होगा और ध्यान भी नहीं दिया होगा। सड़क के किनारे, खाली पड़ी जमीनों में या अपने बगीचे में वो झाड़ीदार, सफेद फूलों वाला पौधा? वो ही है पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस, जिसे कांग्रेस घास भी कहते हैं। देखने में तो ऐसा लगता है जैसे कुछ नहीं करेगा लेकिन धोखा मत खाना – ये हरा पौधा चुपचाप गड़बड़ करता रहता है। खासकर आपके फेफड़ों के लिए तो बहुत घातक हो सकता है।

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Apr 17, 2025
Respiratory illness

These White Flowers Trigger Respiratory Illness : आपने अक्सर सड़कों के किनारे, खाली प्लॉट्स या अपने ही बगीचे में एक झाड़ी को सफेद फूलों (White Flowers) के साथ खिला देखा होगा। दिखने में सुंदर और भोली लगने वाली यह झाड़ी दरअसल एक खतरनाक दुश्मन है — नाम है पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस, जिसे आम भाषा में कांग्रेस घास (Congress Grass) कहा जाता है। यह घास आपकी सांस की सेहत (Respiratory) के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

क्या है पार्थेनियम? (What is Parthenium?)

पार्थेनियम (Parthenium) एक विदेशी घास है जो मूल रूप से सेंट्रल अमेरिका से आई है और भारत में 1950 के दशक में पहुंची। आज यह देशभर में तेजी से फैल चुकी है — हाईवे, खेत, रेलवे ट्रैक, पार्क और यहां तक कि शहरों में भी।

इस घास (Congress Grass) की सबसे खतरनाक बात है कि यह हवा में एक ज़हरीला रसायन 'पार्थेनिन' छोड़ती है। यह रसायन आपकी आंखों, त्वचा और फेफड़ों को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

सांस से जुड़े खतरे: छिपा दुश्मन

जब पार्थेनियम (Parthenium) में फूल आते हैं, तब यह घास बहुत सूक्ष्म कण और परागकण (Pollen) हवा में छोड़ती है। यह कण सांस के साथ आपके शरीर में चले जाते हैं और अगर आपकी इम्यून सिस्टम या फेफड़े कमजोर हैं, तो आप मुश्किल में पड़ सकते हैं।

सामान्य लक्षण:

- एलर्जिक राइनाइटिस (लगातार छींक आना, नाक बहना)

- अस्थमा (सांस फूलना, सीने में जकड़न)

- गला खराब रहना या खांसी जो ठीक न हो

- साइनस की समस्या या पोस्ट-नेजल ड्रिप

- हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस (फेफड़ों में गंभीर सूजन)

किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?

पार्थेनियम (Parthenium) हर किसी को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन कुछ लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं:

- अस्थमा या एलर्जी वाले लोग

- बच्चे और बुज़ुर्ग, जिनके फेफड़े कमजोर होते हैं

- माली, किसान और निर्माण स्थल के मजदूर जो बाहर ज्यादा रहते हैं

- खासकर जब हवा में परागकण ज्यादा होते हैं (मानसून के बाद)

लक्षण पहचानें — वक्त रहते

अगर आप नीचे दिए गए लक्षणों को नजरअंदाज कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए:

- रोज सुबह छींक आना या नाक बंद रहना
- बिना मेहनत के भी सांस फूलना
- लगातार सूखी खांसी
- आंखों में खुजली या पानी
- इनहेलर का बार-बार इस्तेमाल करना

अगर ये लक्षण हर साल एक ही मौसम में दोहराते हैं (खासकर बारिश के बाद), तो आपके आस-पास पार्थेनियम हो सकता है।

बचाव ही सबसे अच्छा इलाज है

- पार्थेनियम को पहचानें और इसे अपने घर/बगीचे से हटाएं

- बगीचे में काम करते समय मास्क और दस्ताने पहनें

- घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें

- लक्षण दिखने पर समय पर डॉक्टर से सलाह लें

- अपने इलाके की नगरपालिका से इसकी सफाई की मांग करें

पार्थेनियम घास जितनी साधारण दिखती है, उतनी ही घातक हो सकती है। यह हमारे वातावरण और शरीर दोनों को नुकसान पहुंचा रही है। इसकी पहचान और रोकथाम करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। क्योंकि सांसें सबकी हैं।

खुद को इस घास से बचाने के लिए कुछ चीजें कर सकते हैं:

पौधे को सीधे मत छुओ: इसे नंगे हाथों से निकालने की कोशिश भी मत करना।
सुरक्षा का सामान पहनो: अगर इसे हटाना पड़े तो हमेशा दस्ताने, मास्क और पूरी बाजू के कपड़े पहनो।
खिड़कियाँ बंद रखो: खासकर सुबह और शाम के समय जब हवा में पराग ज्यादा होता है।
घर में हवा साफ करने वाली मशीन (एयर प्यूरीफायर) लगाओ: अगर घर में किसी को अस्थमा या एलर्जी है तो यह बहुत काम आएगा।
नाक साफ करने के लिए नमक के पानी का स्प्रे इस्तेमाल करो: इससे पराग निकल जाएगा।
अगर एलर्जी है तो डॉक्टर से सलाह लो: वो एंटीहिस्टामाइन या इन्हेलर जैसी दवाएं दे सकते हैं जिससे आराम मिलेगा।
अपने इलाके में सफाई अभियान चलाने के लिए दबाव डालो: इस पौधे को बढ़ने से रोकना ही सबसे अच्छा तरीका है। इसके लिए आपके शहर के अधिकारी मदद कर सकते हैं।

यह जो पार्थेनियम है, देखने में तो बस एक आम घास की तरह लगता है, लेकिन यह आपकी सेहत के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है, खासकर आपके फेफड़ों के लिए। यह उस बिन बुलाए मेहमान की तरह है जो चला तो जाता नहीं और आपकी तबीयत खराब कर देता है। इसके बारे में जितनी जानकारी होगी, आप उतना ही बेहतर तरीके से अपना बचाव कर पाएंगे।\

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Updated on:
17 Apr 2025 10:44 am
Published on:
17 Apr 2025 10:42 am
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