स्वास्थ्य

Vitamin D and Dengue: डेंगू में प्लेटलेट्स ही नहीं, विटामिन D भी है गेम चेंजर! कोलंबिया की स्टडी में खुलासा

Vitamin D and Dengue: नई रिसर्च के मुताबिक विटामिन D की कमी डेंगू को गंभीर बना सकती है। जानें स्टडी क्या कहती है और डॉक्टरों की सलाह।
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Jan 23, 2026
Vitamin D and Dengue
Vitamin D and Dengue (Photo- gemini ai)

Vitamin D and Dengue: कोलंबिया में हुई एक नई क्लिनिकल स्टडी में यह सामने आया है कि विटामिन D की कमी होने पर डेंगू ज्यादा गंभीर रूप ले सकता है। यह रिसर्च इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (IJMR) में प्रकाशित हुई है, जो ICMR की प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल है। भारत जैसे देश के लिए यह अध्ययन खास तौर पर अहम है, क्योंकि यहां डेंगू भी आम है और विटामिन D की कमी भी बड़े पैमाने पर पाई जाती है।

भारत में हर साल मानसून के दौरान डेंगू के मामले तेजी से बढ़ते हैं। अस्पतालों में तेज बुखार, प्लेटलेट्स गिरना और ब्लीडिंग जैसी समस्याओं के मरीज भर जाते हैं। हालांकि कई लोग सामान्य इलाज से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मरीज अचानक गंभीर हालत में पहुंच जाते हैं। सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि शुरुआत में यह अंदाजा लगाना मुश्किल होता है कि कौन सा मरीज ज्यादा बिगड़ सकता है।

स्टडी में क्या पाया गया

कोलंबिया के शोधकर्ताओं ने लगभग 100 डेंगू मरीजों के ब्लड सैंपल की जांच की। इन मरीजों को बीमारी की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग ग्रुप में रखा गया और उनकी तुलना स्वस्थ लोगों से की गई। रिसर्च में विटामिन D और एक खास molecule miRNA-155 को मापा गया, जो शरीर की इम्यून और सूजन (inflammation) से जुड़ी प्रतिक्रिया को कंट्रोल करता है।

स्टडी में पाया गया कि जिन मरीजों को डेंगू हल्के रूप में हुआ था, उनमें विटामिन D का स्तर बेहतर था। वहीं जिन मरीजों में डेंगू गंभीर था या चेतावनी वाले लक्षण थे, उनमें विटामिन D की भारी कमी देखी गई। इसके उलट, miRNA-155 का स्तर बीमारी की गंभीरता के साथ बढ़ता गया, जो यह दिखाता है कि ऐसे मरीजों में इम्यून सिस्टम जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाता है।

सूजन और विटामिन D का संबंध

रिसर्च में यह भी सामने आया कि जिन मरीजों में विटामिन D कम था, उनमें सूजन बढ़ाने वाले तत्व जैसे TNF-alpha और Interleukin-6 ज्यादा थे। ये वही तत्व हैं जो डेंगू के गंभीर रूप, जैसे डेंगू हेमरेजिक फीवर, से जुड़े होते हैं। AIIMS के एंडोक्राइनोलॉजी प्रोफेसर डॉ. आर. गोस्वामी का कहना है कि यह स्टडी पहले से मौजूद सबूतों को और मजबूत करती है। उनके मुताबिक, यह रिसर्च यह भी समझाने में मदद करती है कि miRNA-155 के जरिए इम्यून सिस्टम कैसे बिगड़ता है। इसलिए विटामिन D का स्तर सामान्य रखना समझदारी भरा कदम है।

भारतीय डॉक्टरों का अनुभव

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के डॉ. पंकज सोनी कहते हैं कि विटामिन D की कमी से ब्लीडिंग और दूसरी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। हालांकि वह साफ करते हैं कि विटामिन D कोई इलाज नहीं है, लेकिन यह एक ऐसा जोखिम है जिसे बदला जा सकता है। वहीं सर गंगाराम अस्पताल के डॉ. अतुल गोगिया के अनुसार, गंभीर डेंगू अक्सर साइटोकाइन स्टॉर्म की वजह से होता है और विटामिन D की कमी सुधारने से जटिलताएं कम हो सकती हैं, लेकिन इसके लिए और बड़े अध्ययन जरूरी हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है यह रिसर्च

भारत में 2025 के नवंबर तक करीब 1.13 लाख डेंगू केस और 95 मौतें दर्ज की गईं। दूसरी तरफ, देश की बड़ी आबादी विटामिन D की कमी से जूझ रही है। विशेषज्ञ खुद से दवा लेने की सलाह नहीं देते, लेकिन यह स्टडी संकेत देती है कि भारत में इस पर और रिसर्च होनी चाहिए, ताकि ज्यादा खतरे वाले मरीजों की पहचान समय रहते हो सके और डेंगू से होने वाली गंभीर परेशानियों को कम किया जा सके।

Updated on:
23 Jan 2026 05:14 pm
Published on:
23 Jan 2026 05:14 pm