स्वास्थ्य

मल्टीपल स्केलेरोसिस की बीमारी महिलाओं को क्यों होती है ज्यादा? वैज्ञानिकों ने बताई वजह

Multiple Sclerosis: मल्टीपल स्केलेरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर का अपना ही डिफेंस सिस्टम नसों को नुकसान पहुंचाने लगता है। लंबे समय से यह रहस्य था कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को यह बीमारी 3 से 4 गुना ज्यादा क्यों होती है। अब वैज्ञानिकों ने पाया है कि महिलाओं के X क्रोमोसोम में मौजूद एक खास तरह का अणु इस खतरे को बढ़ा देता है।

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May 06, 2026
Multiple Sclerosis (Image- gemini)

Multiple Sclerosis: हमारी नसें बिजली के तारों की तरह होती हैं, जिन पर सुरक्षा के लिए प्लास्टिक जैसी एक परत चढ़ी होती है। MS की बीमारी में हमारा शरीर गलती से इसी परत को दुश्मन समझकर उस पर हमला कर देता है। सालों तक डॉक्टर इसके पीछे सिर्फ हार्मोन्स को जिम्मेदार मानते थे, लेकिन अब एक नई रिसर्च ने बताया है कि इसका असली कारण महिलाओं के जींस के अंदर छिपा हुआ है।

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महिलाओं को क्यों होता है ज्यादा?

इंसान के शरीर की बनावट क्रोमोसोम पर टिकी होती है। पुरुषों में एक X और एक Y क्रोमोसोम (XY) होता है, जबकि महिलाओं में दो X क्रोमोसोम (XX) होते हैं। कुदरती तौर पर, महिलाओं के शरीर में एक X क्रोमोसोम को शांत रहना पड़ता है ताकि प्रोटीन का संतुलन बना रहे। इस काम को करने के लिए शरीर Xist नाम का एक विशेष अणु बनाता है।

कोलोराडो विश्वविद्यालय के एंशुट्ज़ मेडिकल कैंपस के मुताबिक, यह Xist अणु जब खास प्रोटीनों के साथ जुड़ता है, तो यह शरीर के अंदर एक अजीब तरह की हलचल पैदा कर देता है। ये गुच्छे इम्यून सिस्टम को भ्रमित कर देते हैं। यह प्रक्रिया केवल महिलाओं के शरीर में होती है, इसलिए उनका इम्यून सिस्टम पुरुषों की तुलना में अधिक 'हाइपर' हो जाता है और अपनी ही नसों पर हमला करने का जोखिम बढ़ जाता है।

क्या है यह नई खोज?

अब तक MS का इलाज केवल लक्षणों को दबाने या नसों की सूजन कम करने तक सीमित था। लेकिन अब जब वैज्ञानिकों को यह पता चल गया है कि Xist अणु ही असली विलेन है, तो भविष्य में ऐसी दवाएं बनाना मुमकिन होगा जो सीधे इस प्रक्रिया को रोक सकें। यह खोज न केवल MS, बल्कि महिलाओं में होने वाली अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों जैसे ल्यूपस और रुमेटीइड अर्थराइटिस को समझने में भी मदद करेगी।

डॉक्टरों की राय और भविष्य की उम्मीद

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह खोज चिकित्सा जगत में एक बड़ा मोड़ है। इससे भविष्य में महिलाओं के लिए पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट की राह खुलेगी, यानी ऐसी दवाएं जो खास तौर पर महिलाओं के जेनेटिक स्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर बनाई जाएंगी। यह न केवल बीमारी को बढ़ने से रोकेगा, बल्कि मरीजों को एक बेहतर और दर्दमुक्त जीवन जीने में मदद करेगा।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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