स्वास्थ्य

कुत्ते के काटने पर टिटनेस का इंजेक्शन लगवाने से मौत! डॉक्टर से जानें कब नहीं लगवाना चाहिए ये इंजेक्शन

Tetanus Side Effect: ग्वालियर के एक शख्स की कुत्ते के काटने के बाद मौत हो गई क्योंकि उसे एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) की जगह टिटनेस का इंजेक्शन लगा दिया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज एक जानलेवा वायरल बीमारी है, जिसमें टिटनेस का इंजेक्शन कोई फायदा नहीं पहुंचाता। एक बार लक्षण दिखने के बाद रेबीज का कोई इलाज नहीं है, इसलिए सही समय पर सही वैक्सीन लगवाना ही जान बचा सकता है।

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May 05, 2026
Tetanus Side Effect (Image- gemini)

Tetanus Side Effect: आम तौर पर लोगों को लगता है कि किसी जानवर ने काट लिया है, तो बस एक टिटनेस का इंजेक्शन लगवा लेना काफी है। लेकिन ग्वालियर की एक दर्दनाक घटना ने इस गलतफहमी की भारी कीमत चुकाई है। 36 साल के राजू कुशवाहा को एक कुत्ते ने काटा, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में टिटनेस का शॉट दे दिया गया, लेकिन रेबीज की वैक्सीन नहीं दी गई। लगभग 20 दिन बाद जब उन्हें पानी से डर लगने लगा (हाइड्रोफोबिया) और हालत बिगड़ी, तब पता चला कि उन्हें रेबीज हो चुका है। डॉक्टर दीपा अग्रवाल (MD, एलर्जी स्पेशलिस्ट) और डॉक्टर जे. कीर्तना (Infectious Diseases Expert) से जानें कब टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना चाहिए और कब नहीं?

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टिटनेस और रेबीज में फर्क?

अक्सर लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं कि कौन सा इंजेक्शन कब लगवाना है। डॉक्टर जे. कीर्तना (Infectious Diseases Expert) बताती हैं कि टिटनेस और रेबीज दो बिल्कुल अलग बीमारियां हैं। टिटनेस एक बैक्टीरिया से होता है जो मिट्टी या गंदगी में मिलता है। यह जख्म में इन्फेक्शन रोकने के लिए होता है।
रेबीज एक घातक वायरस (RNA virus) से होता है जो सिर्फ रेबीज की वैक्सीन से ही खत्म हो सकता है। टिटनेस का इंजेक्शन लगवाने से रेबीज का वायरस नहीं मरता। डॉग बाइट के केस में टिटनेस लगवाना बुरा नहीं है, लेकिन वह एंटी-रेबीज वैक्सीन का विकल्प कभी नहीं हो सकता।

क्या हर चोट पर इंजेक्शन जरूरी है?

अगर आपने पिछले 6 महीने से 1 साल के भीतर टिटनेस का इंजेक्शन लगवाया है, तो हर छोटी-मोटी चोट पर दोबारा इंजेक्शन लगवाने की जरूरत नहीं होती। अगर घाव बहुत गहरा है, उसमें बहुत ज्यादा मिट्टी या गंदगी घुस गई है, या वह किसी बहुत ज्यादा जंग लगे लोहे से लगा है, तो डॉक्टर रिस्क न लेते हुए दोबारा इंजेक्शन लगाने की सलाह दे सकते हैं। आमतौर पर टिटनेस की एक डोज का असर 5 से 10 साल तक रहता है। मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार, वयस्कों को हर 10 साल में एक बार टिटनेस का बूस्टर शॉट ले लेना चाहिए ताकि शरीर में इसकी इम्यूनिटी बनी रहे।

टिटनेस का इंजेक्शन कब लगवाना चाहिए?

अगर आपने पिछले 6 महीने या 1 साल से टिटनेस का शॉट नहीं लिया है, तो चोट लगने के 24 घंटे के भीतर इसे लगवा लेना चाहिए। आमतौर पर एक शॉट का असर 5 से 10 साल तक रहता है, लेकिन डॉक्टर रिस्क न लेते हुए चोट लगने पर इसे लगवाने की सलाह देते हैं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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