
Wisdom Teeth Hindi: जब कोई इंसान 17 से 25 साल की उम्र के बीच पहुंचता है, तो अक्सर मुंह के पिछले हिस्से में एक हल्का-मीठा सा दर्द शुरू होता है। बड़े-बुजुर्ग तुरंत कह देते हैं, अक्ल दाढ़ निकल रही है! लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर इंसान की अक्ल दाढ़ (Wisdom Teeth) नहीं निकलती? बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें पूरी जिंदगी कभी अक्ल दाढ़ आती ही नहीं। अक्ल दाढ़ का नाम सुनकर ही अक्सर लोग दर्द, सूजन और डॉक्टर के पास जाने के ख्याल से घबराने लगते हैं। ये दांत हमारे मुंह के सबसे आखिरी दांत होते हैं। आइए समझते हैं कि ये दांत क्यों निकलते हैं, हर किसी में क्यों नहीं आते और ये कब हमारे लिए मुसीबत बन जाते हैं।
मेयो क्लिनिक के मुताबिक, अगर इतिहास में पीछे जाएं, तो हमारे पूर्वजों का खानपान आज के मुकाबले बिल्कुल अलग था। वे कच्चा मांस, पेड़-पौधों की जड़े, सख्त मेवे और सख्त खाना चबा-चबाकर खाते थे। उस जमाने में खाने को अच्छी तरह पीसकर पचाने के लिए मुंह में ज्यादा दांतों और मजबूत जबड़ों की जरूरत होती थी। अक्ल दाढ़ उसी दौर की देन है। इन्हें अक्ल दाढ़ इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये आमतौर पर 17 से 25 साल की उम्र के बीच निकलते हैं जब इंसान माना जाता है कि थोड़ा समझदार या अक्लमंद हो चुका होता है। वैज्ञानिक भाषा में इनका अक्ल या बुद्धिमत्ता से कोई सीधा लेना-देना नहीं होता, यह बस उम्र का एक पड़ाव दर्शाते हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, आपने अक्सर अपने आसपास देखा होगा कि कुछ लोगों को चारों अक्ल दाढ़ आ जाती हैं, तो कुछ को सिर्फ एक या दो ही आती हैं। वहीं कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें एक भी अक्ल दाढ़ नहीं निकलती। ऐसा होना बिल्कुल सामान्य है और इसके पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं;
अगर अक्ल दाढ़ सीधी और सही जगह पर निकल रही है, तो यह कोई परेशानी नहीं देती। लेकिन जबड़े में जगह की कमी के कारण जब यह टेढ़ी-मेढ़ी निकलने लगती है, तब परेशानियां शुरू होती हैं। इसे डॉक्टरी भाषा में 'इम्पैक्टेड विजडम टूथ' (Impacted Wisdom Tooth) कहते हैं। ऐसी स्थिति में आपको मसूड़ों में तेज दर्द और सूजन हो सकती है। जब अक्ल दाढ़ जगह न होने पर सीधे निकलने के बजाय टेढ़ी होकर बगल वाले दांत को धक्का देती है, तो इससे दूसरे दांतों में कैविटी (कीड़ा लगना) या उनकी जड़ें खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। दर्द और सूजन इतनी बढ़ सकती है कि खाना चबाना या पूरा मुंह खोलना भी मुश्किल हो जाता है। मुंह के एकदम पीछे होने के कारण वहां तक टूथब्रश ठीक से नहीं पहुंच पाता। सफाई न होने से बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे सांसों में बदबू और दांतों में सड़न होने लगती है। दुर्लभ मामलों में, मसूड़े के अंदर दबे हुए अक्ल दाढ़ के आसपास तरल पदार्थ से भरी थैली (सिस्ट) बन सकती है, जो जबड़े की हड्डी को नुकसान पहुंचा सकती है।
अगर आपकी अक्ल दाढ़ निकल रही है और हल्का दर्द है, तो गुनगुने पानी में नमक डालकर कुल्ला करने या बर्फ से सिकाई करने से आराम मिल सकता है। लेकिन अगर दर्द बहुत तेज हो जाए और कान या सिर तक फैलने लगे। मसूड़ों से खून या मवाद आ रहा हो। गाल में सूजन आ जाए या बुखार महसूस हो तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।