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शरीर पर खून के धब्बे जैसे निशान को नजरअंदाज न करें, Cleveland Clinic ने बताए Purpura के कारण

Purpura Cause: त्वचा पर लाल या बैंगनी रंग के धब्बे दिख रहे हैं? इसे मामूली निशान समझकर न भूलें! क्लीवलैंड क्लिनिक और हेल्थलाइन से जानिए Purpura के मुख्य कारण और लक्षण।
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भारत

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Nidhi Yadav

Sep 03, 2026

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त्वचा पर लाल या बैंगनी रंग के धब्बे Purpura का संकेत हो सकते हैं- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Purpura Symptoms: क्या आपने कभी अपनी या अपने परिवार के किसी सदस्य की त्वचा पर लाल, बैंगनी या भूरे रंग के ऐसे छोटे-छोटे धब्बे देखे हैं, जो दबाने पर भी हल्के या सफेद नहीं पड़ते? कई बार हम इन्हें सामान्य चोट (गुम चोट), चींटी का काटना या किसी कीड़े का असर समझकर छोड़ देते हैं। लेकिन त्वचा के नीचे खून जमने से बनने वाले इन निशानों को मेडिकल भाषा में पर्पुरा (Purpura) कहा जाता है। क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, पर्पुरा त्वचा की ऊपरी सतह का कोई आम दाग नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदर छोटी-छोटी खून की नसों (Blood vessels) के फटने या लीक होने का इशारा होता है। आइए समझते हैं कि पर्पुरा क्या है, यह क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं और डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए।

क्या होता है पर्पुरा (Purpura)?

हेल्थलाइन के अनुसार, पर्पुरा त्वचा पर दिखाई देने वाले लाल या बैंगनी रंग के वे चकत्ते या धब्बे हैं जो त्वचा के ठीक नीचे खून का रिसाव होने से बनते हैं। जब हमारी त्वचा के नीचे की बहुत बारीक नसों (Capillaries) में किसी वजह से छेद हो जाता है या वे टूट जाती हैं, तो खून बाहर निकलकर त्वचा के नीचे जमा हो जाता है। इसी जमे हुए खून की वजह से बाहर लाल-बैंगनी रंग का निशान दिखाई देने लगता है। पर्पुरा का आकार छोटे-छोटे बिंदुओं (पिंस के सिर जितने) से लेकर बड़े चकत्तो जैसा हो सकता है। इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि जब आप इस लाल या बैंगनी निशान को अपनी उंगली से दबाएंगे, तो यह गायब या सफेद (Blanching) नहीं होगा, बल्कि जैसा है वैसा ही बना रहेगा।

पर्पुरा के मुख्य प्रकार

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, पर्पुरा को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा जाता है;

  • थ्रोम्बोसाइटोपेनिक पर्पुरा (Thrombocytopenic Purpura)- यह तब होता है जब खून में प्लेटलेट्स (Platelets) की संख्या बहुत कम हो जाती है। प्लेटलेट्स वही कोशिकाएं हैं जो चोट लगने पर खून को थक्का (Clot) बनाकर बहने से रोकती हैं।
  • नॉन-थ्रोम्बोसाइटोपेनिक पर्पुरा (Non-Thrombocytopenic Purpura)- इसमें प्लेटलेट्स की संख्या तो सामान्य रहती है, लेकिन खून की नसें खुद कमजोर, सूजी हुई या डैमेज हो जाती हैं।

शरीर पर पर्पुरा होने के मुख्य कारण

  • ब्लड प्लेटलेट्स की कमी- डेंगी, मलेरिया, वायरल इन्फेक्शन, ऑटोइम्यून बीमारियां (जैसे ITP) या ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) जैसी स्थितियों में प्लेटलेट्स तेजी से गिरते हैं, जिससे पर्पुरा के निशान बनने लगते हैं।
  • दवाइयों का रिएक्शन- खून पतला करने वाली दवाइयां (Blood thinners), कुछ एंटीबायोटिक्स, या दर्द निवारक दवाइयों का ज्यादा इस्तेमाल करने से भी नसों से खून का रिसाव होने लगता है।
  • बढ़ती उम्र और कमजोर नसें (Senile Purpura)- उम्र बढ़ने के साथ त्वचा पतली हो जाती है और खून की नसें कमजोर पड़ने लगती हैं। ऐसे में बहुत हल्की सी खरोंच या दबाव से भी बुजुर्गों के हाथों-पैरों पर बैंगनी धब्बे बन जाते हैं।
  • नसों में सूजन (Vasculitis)- जब शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपनी ही खून की नसों पर हमला कर देता है, तो नसें सूज जाती हैं और कमजोर होकर फटने लगती हैं।
  • विटामिन सी की भारी कमी (Scurvy)- शरीर में विटामिन सी की कमी होने पर नसें अपनी मजबूती खो देती हैं, जिससे पर्पुरा हो सकता है।
  • गंभीर इन्फेक्शन या बीमारियां- लिवर रोग, किडनी की समस्या, या शरीर में फैला कोई बड़ा बैक्टीरियल इन्फेक्शन भी इसका कारण बन सकता है।

पर्पुरा के लक्षण कैसे पहचानें?

  • त्वचा पर अचानक लाल, बैंगनी या काले-भूरे रंग के धब्बे उभर आना (जो ज्यादातर टांगों, बांहों या मसूड़ों पर दिखते हैं)।
  • धब्बे को दबाने पर उसका रंग हल्का न पड़ना।
  • मसूड़ों या नाक से बिना किसी वजह के खून बहना।
  • पेशाब या शौच (Stool) में खून आना।
  • जोड़ों (घुटनों या टखनों) में दर्द और सूजन होना।
  • बिना किसी बड़ी चोट के भी शरीर पर बहुत आसानी से नीले-बैंगनी निशान (Bruises) पड़ जाना।

डॉक्टर के पास कब जाना है बेहद जरूरी?

  • त्वचा पर अचानक से बहुत सारे लाल-बैंगनी धब्बे फैलने लगें।
  • पर्पुरा के साथ तेज बुखार, कमजोरी या वजन गिरने की समस्या हो।
  • शरीर के किसी अन्य हिस्से (जैसे नाक, मसूड़ों या टॉयलेट) से खून आ रहा हो।
  • यह समस्या छोटे बच्चों या बुजुर्गों में अचानक दिखाई दे।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।