
Yami Gautam Skin Condition Cause: क्या आपने कभी गौर किया है कि आपके या आपके किसी जानकार के हाथों और पैरों पर छोटे-छोटे दाने या बंप्स होते हैं? अक्सर लोग इसे चिकन स्किन समझकर छिपाने की कोशिश करते हैं या इससे परेशान हो जाते हैं। लेकिन सच तो यह है कि यह एक बेहद आम स्थिति है, जिससे डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। पिछले साल बॉलीवुड अभिनेत्री यामी गौतम ने सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी त्वचा की इस सच्चाई को साझा किया। उन्होंने बताया कि वह केराटोसिस पिलारिस (Keratosis Pilaris) नाम की स्थिति से जूझ रही हैं। उन्होंने तस्वीरों में इसे एडिट करने या मेकअप से छिपाने के बजाय जैसा है वैसा ही स्वीकार किया। यामी गौतम का कहना था कि वह अब अपनी इस त्वचा को छिपाने की जगह खुलकर अपनाना चाहती हैं, क्योंकि परफेक्शन केवल एक छलावा है और असली निखार आपके आत्मविश्वास से आता है। आइए जानते हैं कि केराटोसिस पिलारिस क्या होता है? इसके कारण और लक्षण क्या हैं?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, केराटोसिस पिलारिस (KP) एक त्वचा विकार है, जिसे बोलचाल की भाषा में अक्सर चिकन स्किन (Chicken Skin) भी कहा जाता है। इस स्थिति में त्वचा की सतह पर बारीक, सूखे और सख्त दाने बन जाते हैं, जिससे त्वचा को छूने पर वह रेगमाल (sandpaper) जैसी खुरदरी महसूस होती है। यह कोई संक्रामक बीमारी नहीं है, यानी यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती। यह मुख्य रूप से ऊपरी बांहों (arms), जांघों (thighs), गालों (cheeks) और कभी-कभी पीठ या नितंबों (buttocks) पर दिखाई देती है। यह दाने आमतौर पर बेदर्द होते हैं और स्वास्थ्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन कॉस्मेटिक दृष्टिकोण से लोग इन्हें देखकर असहज हो जाते हैं।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, केराटोसिस पिलारिस के होने का सीधा संबंध हमारी त्वचा के सुरक्षात्मक प्रोटीन से है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं;
1.केराटिन का जमाव (Keratin Accumulation)- हमारी त्वचा में 'केराटिन' नाम का एक कठोर प्रोटीन होता है, जो त्वचा को बाहरी संक्रमण और हानिकारक तत्वों से बचाता है। जब शरीर में केराटिन का उत्पादन आवश्यकता से अधिक होने लगता है, तो यह मृत त्वचा कोशिकाओं के साथ मिलकर बालों के रोम छिद्रों (hair follicles) में जमा होने लगता है।
2. रोम छिद्रों का बंद होना- इस जमाव के कारण रोम छिद्र ब्लॉक हो जाते हैं और त्वचा की ऊपरी सतह पर छोटे-छोटे उभार या दाने बन जाते हैं।
3. आनुवंशिकी (Genetic Factors)- यदि आपके परिवार में माता-पिता या भाई-बहन को यह समस्या रही है, तो आपको भी इसके होने की संभावना अधिक होती है।
4.अन्य त्वचा स्थितियां- जिन लोगों को एक्जिमा (Eczema), अस्थमा या अत्यधिक शुष्क त्वचा (Dry Skin) की समस्या होती है, उनमें केराटोसिस पिलारिस होने का जोखिम अधिक रहता है।
डर्मनेट के अनुसार, इस स्थिति की पहचान करना काफी आसान होता है। इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं;
केराटोसिस पिलारिस का कोई पक्का या स्थायी इलाज (permanent cure) नहीं है, लेकिन सही दिनचर्या और देखभाल से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है;
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।