Why Yawning Improves Hearing: क्या जम्हाई लेने के बाद आपको आवाजें ज्यादा साफ सुनाई देती हैं? Dr Karan Rajan बताते हैं इसके पीछे की साइंस और कब ये संकेत बन सकता है बीमारी का।
Yawning Benefits: हम में से ज्यादातर लोग जम्हाई को सिर्फ नींद या थकान का संकेत मानते हैं। लेकिन यूके के सर्जन और हेल्थ कंटेंट क्रिएटर Dr Karan Rajan के अनुसार, जम्हाई लेने के बाद अगर आपको आवाजें ज्यादा साफ सुनाई देती हैं, तो ये कोई भ्रम नहीं है। इसके पीछे पूरी साइंस काम करती है।
डॉ. करण राजन बताते हैं कि जब हम जम्हाई लेते हैं, तो हमारे कान के अंदर मौजूद Eustachian tube खुल जाती है। यह ट्यूब मिडिल ईयर को गले से जोड़ती है और आमतौर पर बंद रहती है। जम्हाई के दौरान जबड़ा स्ट्रेच होता है, जिससे यह ट्यूब खुल जाती है और कान के अंदर का एयर प्रेशर बाहर की हवा के बराबर हो जाता है।
जब कान के अंदर का प्रेशर बैलेंस हो जाता है, तो ईयरड्रम (कान का पर्दा) बेहतर तरीके से वाइब्रेट करता है। इसका सीधा असर यह होता है कि आवाजें ज्यादा क्लियर और शार्प सुनाई देती हैं। इसी वजह से जम्हाई के बाद आपको सुनने में फर्क महसूस होता है।
जम्हाई लेते समय कान की दो छोटी मसल्स टेंसर टिम्पानी और स्टेपेडियस एक्टिव हो जाती हैं। ये मसल्स कुछ समय के लिए आवाज को हल्का दबा देती हैं, लेकिन जैसे ही ये रिलैक्स होती हैं, आपकी सुनने की क्षमता और बेहतर महसूस होती है।
अगर आपने कभी हवाई यात्रा की है, तो कान में “पॉप” होने का अनुभव जरूर हुआ होगा। जम्हाई भी उसी तरह काम करती है, क्योंकि दोनों ही स्थितियों में कान का प्रेशर बैलेंस होता है। फर्क बस इतना है कि जम्हाई के दौरान दिमाग में ब्लड फ्लो भी बढ़ता है, जिससे सुनने की क्षमता थोड़े समय के लिए और तेज हो जाती है।
डॉ. करण राजन के अनुसार, जम्हाई एक तरह का “अकूस्टिक डिफेंस रिफ्लेक्स” भी हो सकता है। यानी यह कान को शरीर के अंदर बनने वाली आवाजों (जैसे दांत पीसना या अपनी आवाज) से बचाने में मदद करता है।
अगर आपको बार-बार जम्हाई लेकर ही कान साफ करने की जरूरत पड़ती है, या एक कान खुलता है और दूसरा नहीं, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह Eustachian tube dysfunction का संकेत हो सकता है, जो एलर्जी, साइनस या एसिड रिफ्लक्स की वजह से होता है। ऐसे में ENT डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।