
Yoga for Snoring: रात की नींद के दौरान आने वाले खर्राटे अक्सर लोग हल्के में ले लेते हैं, लेकिन यह केवल एक सामान्य आदत नहीं बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। जो लोग नियमित रूप से सोते समय खर्राटे लेते हैं, उनमें भविष्य में हृदय से संबंधित समस्याएं होने की संभावना बताई जाती है।
खर्राटे यह संकेत देते हैं कि श्वास नली में कहीं न कहीं रुकावट है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। आइए जानते हैं कि योग और प्राणायाम के माध्यम से इस समस्या को प्राकृतिक रूप से कैसे दूर किया जा सकता है?
खर्राटों के कारण नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इससे थकान, चिड़चिड़ापन और लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए समय रहते इसका समाधान जरूरी है। योग और प्राणायाम के माध्यम से इस समस्या को प्राकृतिक रूप से दूर किया जा सकता है।
खर्राटों की समस्या में नाडी शोधन प्राणायाम अत्यंत प्रभावी माना गया है। इसे करने की विधि क्रमबद्ध रूप से समझना जरूरी है-
1.पहला चरण: योग मुद्रा में आराम से बैठ जाएं। अब दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद करें। बाईं नासिका से बिना किसी दबाव के शांत भाव से श्वास लें। फिर उसी नासिका से हल्के दबाव के साथ किस्तों में श्वास छोड़ें। इस प्रक्रिया को पांच बार दोहराएं। इसके बाद यही प्रक्रिया दाहिनी नासिका से भी पांच बार करें।
2.दूसरा चरण: अब बाईं नासिका से ग्यारह बार श्वास लें और दाहिनी नासिका से छोड़ें। फिर दाहिनी नासिका से ग्यारह बार श्वास लेकर बाईं नासिका से हल्के दबाव के साथ किस्तों में श्वास छोड़ें।
3.तीसरा चरण: इस चरण में बाईं नासिका से श्वास लेकर दाहिनी से छोड़ें और उसी समय दाहिनी से श्वास लेकर बाईं से छोड़ें। इस प्रक्रिया को ग्यारह बार दोहराएं।
इस प्राणायाम के दौरान श्वास के दबाव से नाक के भीतर मौजूद मोड़ वाले बिंदुओं पर बार-बार घर्षण होता है। इससे नासिका द्वार से लेकर फेफड़ों तक की नली की सफाई होती है। श्वसन मार्ग स्वच्छ होने से खर्राटों की समस्या धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है और स्थायी राहत मिलती है।
नाडी शोधन प्राणायाम को दवा की तरह दिन में तीन बार करना चाहिए। सुबह, दोपहर और रात को सोने से पहले इसका अभ्यास लाभकारी होता है। नियमित रूप से लगभग एक महीने तक करने पर खर्राटों की समस्या में 80 से 90 प्रतिशत तक सुधार देखा जा सकता है।
नाडी शोधन प्राणायाम के साथ-साथ जल नेति और रबर नेति का अभ्यास करना भी जरूरी बताया गया है। इससे नाक की सफाई और बेहतर होती है और परिणाम और अधिक प्रभावी मिलते हैं। खर्राटों को हल्के में लेने की बजाय योग के माध्यम से समय रहते समाधान अपनाना स्वास्थ्य के लिए हितकारी है। नियमित अभ्यास से न केवल नींद सुधरती है बल्कि शरीर भी अधिक ऊर्जावान महसूस करता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।