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धरती को बचाने में लगी है 5 साल की ईहा, प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ का ऐसे दे रही है जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई मंचों से इसके लिए जनता से अपील कर चुके हैं। उन्हीं से प्रेरित मेरठ में रहने वाली 6 साल की ईहा पर्यावरण बचाने के लिए सबको प्रेरित कर रही है।

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Jul 21, 2018
धरती को बचाने में लगी है 5 साल की ईहा, प्रधानमंत्री के 'मन की बात' का ऐसे दे रही है जवाब

नई दिल्ली। वैसे तो धरती पर आज के समय में बहुत सी समस्याएं हैं जिनसे हमें लड़ना है लेकिन आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्यावरण को बचाने की है। इस बात पर कोई दो राय नहीं कि दिनों दिन बढ़ती ग्लोबल वार्मिग से हमारी आने वाली पीढ़ी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। इस नुकसान की भरपाई के लिए अब सिर्फ एक ही उपाय है कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं और उनका संरक्षण करें। गौरतलब है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई मंचों से इसके लिए जनता से अपील कर चुके हैं। उन्हीं से प्रेरित मेरठ में रहने वाली 6 साल की ईहा पर्यावरण बचाने के लिए सबको प्रेरित कर रही है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ईहा ने प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो प्रसारण 'मन की बात' से प्रेरित होकर पिछले साल 29 सितंबर को अपने पांचवें जन्मदिन के अवसर पर मेडिकल कॉलेज परिसर में 1008 पौधे लगाए थे।

1008 पौधरोपण के बाद ईहा का अभियान शुरू हो गया जो उनके आस-पास रहने वाले अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रहा है। जानकारी के लिए बता दें कि 6 साल की ईहा को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, यूपी बुक ऑफ रिकॉर्ड, वियतनाम बुक ऑफ रिकॉर्ड, महिला गौरव तथा और भी कई सम्मान मिल चुके हैं। ईहा के पिता कुलदीप चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं। ईहा ने 'ग्रीन ईहा स्माइल क्लब' नामक एक समूह बनाया है, जिसमें उन्होंने अपने छह दोस्तों को शामिल किया है। ये सभी बच्चे प्रत्येक रविवार को अलग-अलग स्थानों पर पौधरोपण करते हैं। ईहा का कहना है कि वह किसी के जन्मदिन पर पौधों का उपहार देकर उनसे पौधरोपण का वादा लेती है। ईहा बताती है कि वह हर रविवार लगभग 10 पौधे लगाती है। ये पौधे ईहा खुद नर्सरी से खरीद कर पहले ही घर पर रख लेती है। ये बच्चे हर रविवार को पौधरोपण करने के अलावा पिछले पौधों का भी निरीक्षण करते रहते हैं। ईहा के अभियान में बच्चों के साथ-साथ अब बड़े लोग भी सक्रियता से भाग ले रहे हैं। रविवार को जिन लोगों के पास कोई काम नहीं होता, वे ईहा के साथ जाकर पौधारोपण करते हैं।

ईहा के पिता बताते हैं कि, पहले वे इसे सिर्फ एक बच्चे की जिद समझकर इसे इतनी गंभीरता से नहीं लेते थे, लेकिन जब ईहा बार-बार इसी बात पर डटी रही तो उसकी मंशा को समझते हुए उन्होंने भी ईहा का पूरा सहयोग करने का फैसला लिया। ईहा के पिता बताते हैं कि, ईहा घर पर आने वाले आम और जामुनों को खाने के बाद उनकी गुठलियों को भी गमलों में लगा देती थी। इस बाद दो हफ्ते में ही उनमें अंकुर फूटने लगे। ईहा का कहना है कि, वह इन आम के 40 पौधों को लगाकर एक बाग तैयार करेगी जिसके लिए अभी वह जमीन तलाश रही है। इस मुहिम के लिए ईहा को कई राजनेताओं की भी सराहना मिल चुकी है।

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Published on:
21 Jul 2018 09:50 am
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