बाल श्रम को रोकने के लिए आज विश्व स्तर पर दिवस मनाया जा रहा है। हर क्षेत्र में काम कर रहे बाल मज़दूरों की हालत पर ध्यान दिया जा रहा है। बाल श्रमिकों की दुर्दशा पर हर संभव तरीके से रोक लगाने की कवायद हो रही है।
नई दिल्ली।भारत में बाल श्रम का ग्राफ़ तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। लगातार बाल श्रमिकों की संख्या में इज़ाफा हो रहा है जिसकी रोकथाम करना बहुत जरूरी है। भारत के अलावा यह अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रहा है। बाल श्रम को रोकने के लिए ही अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने साल 2002 से प्रतिवर्ष 12 जून को World day against child labour मनाए जाने की शुरूआत की। बाल श्रम को रोकने के लिए श्रम संगठन द्वारा आवश्यक कार्रवाई और जरूरी प्रयासों को करने का काम किया है।
युनाइटेड नेशन यानी संयुक्त राष्ट्र के हिसाब से बाल श्रमिकों की दशा को उजागर करने और इसके विरूद्ध सरकार द्वारा जरूरी कदमों को उठाना जरूरी माना गया है। इसके जुड़े आंकड़ों की बात करें तो विश्व संस्था के अनुमान के मुताबिक करीब 152 मिलियन बच्चे ऐसे है जो बाल श्रमिक हैं।
विश्व स्तर पर बाल मज़दूरी के खिलाफ रोकथाम के लिए और साथ ही बच्चों की तस्करी रोकने के लिए कई प्रभावी उपाय किए गए हैं लेकिन माना जा रहा है कि इसपर अभी भी पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जा सकी है।
इस साल बाल श्रम के खिलाफ मनाए जा रहे विश्व दिवस पर बाल श्रमिकों को न्याय दिलाने के लिए खास थीम के तहत काम किया जा रहा है।
खेती-बाड़ी में काम करने वाले बाल श्रमिकों की संख्या की रोकथाम की भी आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन सभी तरीकों से हो रहे बाल श्रम के खिलाफ काम कर रहा है इस दौरान उन्हे कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा जिन पर तत्काल कार्रवाई भी की जा रही है।