इंसान में टैलेंट है तो उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता> प्रतिभा के दम पर इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता। जरूरत पड़े तो घर बैठे अपने बेडरूम में लेटे लेटे ही लाखों रुपए कमा सकता है। कुछ ऐसा ही एक युवक ने कर दिखाया है। उसने महज 18 मरीनों में ही अपने बेडमरू में लेटे-लेटे 20 लाख रुपए कमा लिए।
प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। अगर आप में टैलेंट है तो आप दुनिया के किसी भी कोने में हो भूखे नहीं रहेंगे। बल्कि दूसरों के लिए भी मिसाल बन सकते हैं। कुछ ऐसा ही एक युवा ने कर दिखाया है। इस युवक ने अपने बेडरूम से लेटे लेटे ही लाखों रुपए कमा लिए। उसकी इस प्रतिभा के बारे में जिसने सुना हो हैरान रह गया। ये सफलता की कहानी लिखी है यूके में रहने वाले 17 साल के सैम बेजर ने। सैम ने मात्र 18 महीने में अपने बेडरुम से करीब 20 लाख रुपए कमा कर हर किसी को अपना मुरीद बना लिया है। 17 वर्षीय सैम भले ही लखपति बनाकर चर्चा में आ गया है, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उसने भी कड़ी मेहनत की है। उसके लिए लाइफ आसान नहीं थी।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर सैम ने ऐसा कौन सा काम किया? आपको बता दें कि सैम ने मोबाइल के फोन केस को बेचकर इतने पैसे कमा लिए हैं। इसके लिए उसे जगह-जगह भटकने की जरूरत नहीं पड़ी। बल्कि घर के एक छोटे से कमरे से उसने ये काम कर दिखाया।
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सैम ने अपने इस बिजनेस का नाम On The Case 4U रखा है। फिलहाल सैम हर हफ्ते में करीब 50 फोनकवर ऑनलाइन बेच रहा है। इसके अलावा यूके के कई शॉपिंग माल्स में वेंडिंग मशीन के जरिए भी सैम के बनाए फोन कवर्स बिक रहे हैं।
यही नहीं इस काम के अलावा सैम टिकटोक और इंस्टाग्राम के जरिए भी अपने प्रॉडक्ट की सेल कर रहा है। यानि कमाई का कोई भी जरिया सैम नहीं छोड़ता।
ऑटिस्टिक है सैम
17 वर्षीय सैम भले ही लखपति बनाकर चर्चा में आ गया है, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उसने भी कड़ी मेहनत की है। उसके लिए लाइफ आसान नहीं थी। सैम को आटिज्म है। लेकिन वो अपने परिवार के लिए कुछ करना चाहता था। लिहाजा कुछ करने के लिए सैम ने ऑनलाइन फोन कवर्स बनाना सीख लिया।
इसके बाद कई महीने की रिसर्च में इन्हें बेचने के तरीके पर फोकस किया। 18 महीने में उसने जो कुछ कमाया है उसपर सैम को काफी गर्व है। सैम की कामयाबी हर तरफ चर्चा हो रही है। जो भी सैम के इस काम के बारे में जानता है वो उसकी तारीफ किए बगैर नहीं रहता। ऑटिज्म के बावजूद सैम के टैलेंट ने उसे अपनी पहचान बनाने में मदद की।
बचपन से कर रहा संघर्ष
सैम की मां हन्ना के मुताबिक, बचपन में सैम को कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ा। उसे स्कूल में काफी चिढ़ाया जाता था। यहां तक कि उसके स्कूल टीचर्स भी उसे नाकमायाब बताते थे, लेकिन हन्ना को यकीन था कि एक दिन उसका बेटा उसका नाम रोशन करेगा।
अब सैम की अचीवमेंट पर उसे काफी गर्व है। सैम पहले सादे फोन कवर्स खरीदता है और फिर उसके ऊपर अपने प्रिंटिंग प्रेस के जरिये बनाए गए डिजाइंस को ट्रांसफर करता है। इस तरह 18 महीने में उसने दो लाख रुपए कमा लिए हैं।
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