इंदौर

MP में जल्द पूरा होगा ’10 हजार करोड़’ का ये प्रोजेक्ट, शहरों के बीच आसान होगा सफर

Simhastha 2028: प्रोजेक्ट जमीन पर उतरने की दिशा में तेजी पकड़ लेगा। इससे इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा और कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
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Updated: 22 Apr 2026, 5:35 PM IST
10000 Crore Project Set for Completion Before Simhastha 2028 mp news
10000 Crore Project Set for Completion Before Simhastha 2028 (फोटो- Patrika.com)

mp news:इंदौर से उज्जैन के बीच प्रस्तावित मेट्रो प्रोजेक्ट अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। दिल्ली मेट्रो कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) की ओर से तैयार की गई डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) प्रबंधन को सौंप दी गई है, लेकिन अंतिम मुहर से पहले इसमें बड़े बदलाव की संभावनाएं बन रही हैं। खासकर स्टेशनों की लोकेशन और अंडरग्राउंड हिस्से को लेकर इंजीनियरों के स्तर पर गहन समीक्षा जारी है।

डीपीआर में सुझाए गए 11 स्टेशनों में कुछ

फेरबदल हो सकता है। कई स्थानों पर यात्रियों की संभावित संख्या, ट्रैफिक फ्लो और जमीन की उपलब्धता को देखते हुए स्टेशनों की लोकेशन आगे पीछे की जा सकती है। वहीं उज्जैन शहर के भीतर मेट्रो को भूमिगत करने का प्रस्ताव भी जोड़ा गया है, जिससे स्टेशन संख्या में कमी या बढ़ोतरी संभव है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्टेशनों की अंतिम संख्या और लोकेशन क्या होगी। रिव्यू के बाद जैसे ही संशोधित डीपीआर को मंजूरी मिलेगी, प्रोजेक्ट जमीन पर उतरने की दिशा में तेजी पकड़ लेगा। इससे इंदौर उज्जैन के बीच यात्रा और कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

लवकुश चौराहे से उज्जैन स्टेशन तक प्रस्तावित रूट

मेट्रो का प्रस्तावित रूट इंदौर के लवकुश चौराहे से शुरू होकर उज्जैन महाकाल मंदिर तक जाएगा। इस कॉरिडोर में भौरासला, बारोली, निनोरा, त्रिवेणी घाट, नानाखेडा और आइएसबीटी जैसे प्रमुख स्थानों को जोड़ने की योजना है। हालांकि, वर्तमान रिव्यू के बाद इनमें बदलाव से इन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी की तस्वीर भी बदल सकती है।

फिजिबिलिटी के बाद अब फाइन ट्यूनिंग

डीएमआरसी को पहले फिजिबिलिटी सर्वे और फिर डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। सर्वे में इस रूट पर पर्याप्त यात्री मिलने के संकेत मिले, जिसके बाद डीपीआर बनाई गई। अब इंजीनियरिंग टीम रिपोर्ट के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है ताकि प्रोजेक्ट व्यावहारिक और लागत के लिहाज से संतुलित बन सके।

10 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट, सिंहस्थ से पहले लक्ष्य

करीब 10,000 करोड़ की लागत वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को 2028 के सिंहस्थ (Simhastha 2028) महापर्व से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में समयसीमा को ध्याना में रखते हुए तेजी से निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।

कब है सिंहस्थ?

मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन में हर 12 वर्ष बाद सिंहस्थ महाकुंभ आयोजन होता है। शहर में अगला महाकुंभ साल 2028 में होने वाला है। सिंहस्थ की डेट भी सामने आ चुकी है। यह सिंहस्थ 27 मार्च 2028 से 27 मई 2028 तक यानी पूरे 2 महीने का होने वाला है। इस महाकुंभ में करीब 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। (mp news)

Updated on:
22 Apr 2026, 5:35 PM IST
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