
Indore News :मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर में 11 जून को स्क्रैप कारोबारी मुकुल अग्रवाल से 29.65 लाख की लूट का बुधवार को पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस द्वारा किए गए खुलासे के अनुसार, क्रिप्टो करंसी और कर्ज में फंसे आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर लूट की इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने देवास में रहने वाले मास्टरमाइंड चंद्रशेखर समेत 5 आरोपियों को हिरासत में लिया है।
बताया जा रहा है कि, लूट की इस वारदात को अंजाम देने के लिए बदमाशों ने फर्जी नंबर प्लेट, हेलमेट, के साथ - साथ पुलिस गिरफ्त से बचने के लिए कई हथकंडे अपनाए थे, लेकिन 800 से अधिक सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आगे उनकी हर चालाकी नाकाम साबित रही।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने ये भी कबूल किया कि, वारदात को अंजाम देने के बाद वो सीधे राजस्थान के एक मंदिर पहुंचे। पाप की कमाई से यहां उन्होंने 1 लाख 11 हजार रुपए का चढ़ावा भी चढ़ाया। लेकिन, भगवान के दर से लौटते ही इंदौर पुलिस ने उन्हें चारों तरफ से घेरकर दबोच लिया।
इस सनसनीखेज लूट का खुलासा करते हुए इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि, मास्टरमाइंड चंद्रशेखर पीड़ित स्क्रैप कारोबारी मुकुल अग्रवाल के पास के एक अन्य व्यापारी के यहां काम करता था। उसे मुकुल के लेन - देन की सटीक जानकारी थी। चंद्रशेखर ने ये जानकारी अपने साथी प्रवीण भंडारी को दी थी, जो पहले गोवा में उसके साथ काम कर चुका था। दोनों तंगी से जूझ रहे थे। चंद्रशेखर पर क्रिप्टो करंसी में निवेश को लेकर भारी कर्ज था। इसी के साथ अन्य कर्जों को उतारने के लिए उसने लूट की साजिश कची थी।
संतोष कुमार सिंह के अनुसार, विंध्याचल कॉलोनी में रहने वाले राकेश गोयल की सांवेर रोड स्थित सृष्टि मेटल फैक्ट्री है। 11 जून को उनके कर्मचारी मुकुल अग्रवाल सियागंज, छावनी और गाड़ी अड्डा क्षेत्र के व्यापारियों से रकम लेकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान मछली बाजार इलाके में स्कूटर सवार बदमाशों ने उनसे 29 लाख 65 हजार रुपए से भरा बैग छीनकर फरार हो गए थे।
जांच में सामने आया कि, मुख्य आरोपी चंद्रशेखर उर्फ चंदू मुकाती भारतीय सेना में 16 साल तक सेवा दे चुका है। सेवानिवृत्त होने के बाद वो एक निजी औद्योगिक इकाई में मुनीम का काम कर रहा था। आर्थिक संकट और कर्ज के दबाव में चंदू ने अपने साथी अमर उर्फ भानजा अहिरवार के साथ मिलकर लूट की योजना बनाई। उसने कई दिनों तक मुकुल अग्रवाल की गतिविधियों और आने - जाने के रास्तों की रेकी की, जिसके बाद 11 जून को लूट की वारदात को अंजाम दिया।