
Cancer: पैर के तलवे में होने वाली सूजन या गांठ हर बार सामान्य नहीं होती। यदि यह लंबे समय तक बनी रहे या लगातार बढ़ती जाए तो इसकी चिकित्सकीय जांच कराना बेहद जरूरी है। एमपी के इंदौर में ऐसा ही एक दुर्लभ मामला सामने आया है, जहां पैर के तलवे की साधारण दिखने वाली गांठ की बायोप्सी में साइनोवियल सार्कोमा नामक दुर्लभ कैंसर की पुष्टि हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कि यह कैंसर सामान्यतः घुटने, टखने या अन्य मुलायम ऊतकों में देखा जाता है जबकि तलवे में इसका होना अत्यंत दुर्लभ है।
राऊ स्थित इंदौर कैंसर फाउंडेशन में उपचार के लिए पहुंचे मरीज के पैर के तलवे में काफी समय से सूजन और गांठ थी। शुरुआत में इसे सामान्य समस्या समझा गया, लेकिन जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने बायोप्सी कराने की सलाह दी। जांच रिपोर्ट आने पर पता चला कि गांठ साइनोवियल सार्कोमा है। फाउंडेशन के संस्थापक एवं वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉ. दिग्पाल धारकर ने बताया, उनके लंबे चिकित्सकीय अनुभव में यह तलवे में साइनोवियल सार्कोमा का पहला मामला है। मरीज का साका उपचार शुरू कर दिया गया है और विशेषज्ञों की निगरानी में आगे की चिकित्सा की जा रही है।
डॉ. धारकर के अनुसार, साइनोवियल सार्कोमा अत्यंत दुर्लभ सॉफ्ट टिश्यू कैंसर है। इसके हर वर्ष लगभग 10 लाख लोगों में केवल एक से दो नए मामले सामने आते हैं। यह प्रायः घुटने, एड़ी, टखने या हाथ पैर के जोड़ों के आसपास विकसित होता है, जबकि तलवे में इसकी उपस्थिति चिकित्सा विज्ञान में बेहद असामान्य मानी जाती है।
डॉ. धारकर ने बताया, यह मामला लोगों के लिए महत्वपूर्ण संदेश देता है कि शरीर के किसी भी हिस्से में बनने वाली गांठ या लगातार बनी रहने वाली सूजन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि गांठ का आकार बढ़ रहा हो, दर्द हो रहा हो या कई सप्ताह तक बनी रहे, तो विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराना आवश्यक है। समय पर की गई बायोप्सी गंभीर बीमारी का पता लगाने और सफल उपचार की संभावना बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यह सॉफ्ट टिश्यू (मुलायम ऊतकों) का एक दुर्लभ कैंसर है। सामान्यतः 15 से 40 वर्ष की आयु के लोगों में अधिक देखा जाता है। अधिकतर घुटने, टखने, जांघ या हाथ-पैर के जोड़ों के आसपास विकसित होता है। शुरुआती चरण में यह केवल छोटी गांठ या हल्की सूजन के रूप में दिखाई दे सकता है।
-कई सप्ताह तक बनी रहने वाली गांठ।
-धीरे-धीरे बढ़ती सूजन।
-बिना कारण दर्द या दबाव महसूस होना।
-चलने-फिरने में परेशानी।
-इलाज के बाद भी गांठ खत्म न होना।
हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन लगातार बनी रहने वाली या बढ़ती गांठ की जांच जरूर करानी चाहिए। समय पर पहचान होने से उपचार की सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। डॉ. दिग्पाल धारकर, वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ